अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से पहले पाकिस्तान में अटक रिफाइनरी बंद, वार्ता पर भी संकट के बादल
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता से पहले पाकिस्तान में सुरक्षा कारणों से महत्वपूर्ण औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। पाकिस्तान की अटक रिफाइनरी लिमिटेड (ARL), जो देश के उत्तरी क्षेत्र की एकमात्र रिफाइनरी है, को संचालन अस्थायी रूप से बंद करना,,
इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता से पहले पाकिस्तान में सुरक्षा कारणों से महत्वपूर्ण औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। पाकिस्तान की अटक रिफाइनरी लिमिटेड (ARL), जो देश के उत्तरी क्षेत्र की एकमात्र रिफाइनरी है, को संचालन अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद में विदेशी प्रतिनिधियों के संभावित आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई सड़कों को बंद कर दिया गया है। इसके चलते तेल टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों की ढुलाई पर गंभीर असर पड़ा है।
ARL ने पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज (PSX) और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ऑफ पाकिस्तान (SECP) को दी गई अनिवार्य सूचना में कहा कि सड़क बंद होने के कारण रिफाइनरी के संचालन पर सीधा प्रभाव पड़ा है। कंपनी ने बताया कि कच्चे तेल की आपूर्ति में भारी कमी आने के कारण उसकी मुख्य क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (HBU-I), जिसकी क्षमता 32,400 बैरल प्रतिदिन है, को बंद करना पड़ा है।
यह रिफाइनरी मध्य और उत्तरी पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा तथा गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे क्षेत्रों की ईंधन आवश्यकताओं को पूरा करती है। ऐसे में इसके बंद होने से व्यापक स्तर पर ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।
उधर, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास जारी नौसैनिक नाकेबंदी ने व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित किया है, जो वार्ता में एक बड़ा विवादास्पद मुद्दा बनकर उभरा है।
इस बीच व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की प्रस्तावित इस्लामाबाद यात्रा रद्द कर दी गई है। इसे वार्ता में बढ़ती अनिश्चितता का संकेत माना जा रहा है।
गौरतलब है कि ईरान पहले ही “धमकियों के साए में” बातचीत करने से इनकार कर चुका है। हाल ही में एक ईरानी पोत की जब्ती के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है, जिससे संघर्षविराम वार्ता और अधिक जटिल हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर न केवल पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में व्यापार और आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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