सीजेआई खन्ना बोले: अब ऐसे मामलों की सुनवाई नहीं करूंगा, जिनमें फैसला सुरक्षित रखना पड़े

भारत के 51वें और वर्तमान मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस संजीव खन्ना ने मंगलवार को यह संकेत दिया कि वे 13 मई को होने वाले अपने सेवानिवृत्ति की तैयारी में हैं..

सीजेआई खन्ना बोले: अब ऐसे मामलों की सुनवाई नहीं करूंगा, जिनमें फैसला सुरक्षित रखना पड़े
10-04-2025 - 09:57 AM

नयी दिल्ली। भारत के 51वें और वर्तमान मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस संजीव खन्ना ने मंगलवार को यह संकेत दिया कि वे 13 मई को होने वाले अपने सेवानिवृत्ति की तैयारी में हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अब वे ऐसे मामलों की अंतिम सुनवाई नहीं करेंगे जिनमें फैसला सुरक्षित रखना पड़ता है और फिर घर पर बैठकर विस्तृत निर्णय लिखना होता है।

केरल की पिनाराई विजयन सरकार और राज्यपाल के बीच विधानसभा से पारित विधेयकों को लंबित रखने को लेकर चल रही कानूनी खींचतान के मामले की सुनवाई के दौरान, सीजेआई खन्ना ने वरिष्ठ अधिवक्ता के. के. वेणुगोपाल से कहा कि वे इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगे क्योंकि अब वे कोई भी फैसला सुरक्षित नहीं रखना चाहते।

सीजेआई ने कहा, "अब मैं कोई फैसला सुरक्षित नहीं रखना चाहता। इसी कारण मैं अब सीधे अदालत में ही आदेश और निर्णय सुनाने को प्राथमिकता दे रहा हूं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि केरल सरकार और राज्यपाल के बीच चल रहे इस विवाद को किसी अन्य पीठ को सौंपा जाएगा।

इस पर वरिष्ठ वकील वेणुगोपाल ने कहा, "आज जस्टिस जे. बी. पारडीवाला की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें राज्यपालों द्वारा विधानसभा से पारित विधेयकों को अनिश्चितकाल तक रोककर रखने की प्रथा की आलोचना की गई है। यह मामला भी जस्टिस पारडीवाला की पीठ को सौंपा जा सकता है।" उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 23 महीनों से राज्यपाल ने सात विधेयकों को लंबित रखा हुआ है।

हालांकि, सीजेआई खन्ना ने इस अनुरोध पर स्पष्ट रूप से सहमति नहीं दी और कहा कि पहले दोनों पक्ष उस निर्णय का अध्ययन करें, फिर वे इस मामले को किसी उपयुक्त पीठ को सौंपने के लिए प्रशासनिक आदेश पारित करेंगे।

दोपहर में, सीजेआई खन्ना एक विशेष पीठ की अध्यक्षता कर रहे थे, जिसमें जस्टिस ए. एस. ओका और बेला एम. त्रिवेदी भी शामिल थीं। यह पीठ यूपीए शासनकाल से जुड़े कोयला घोटाले मामलों की सुनवाई कर रही थी। सीजेआई ने कहा, "हम तीनों के पास अब बहुत कम समय है, इसलिए यह मामला किसी अन्य पीठ को सौंपा जाएगा।" हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट के अनुरोध पर और अमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) – वरिष्ठ अधिवक्ताओं आर. एस. चीमा और मनिंदर सिंह – की सहमति से एक विशेष जज को प्रशासनिक कारणों से मामले की सुनवाई से मुक्त करने की अनुमति दी गई।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।