राज्यसभा के सभापति ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का महाभियोग प्रस्ताव खारिज किया
राज्यसभा के सभापति ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी..
राज्यसभा के सभापति ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी गई।
12 मार्च 2026 को दिए गए इस प्रस्ताव पर राज्यसभा के 63 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। सभापति ने प्रस्ताव की समीक्षा करने के बाद इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सभी संबंधित पहलुओं और मुद्दों के “सावधानीपूर्वक और निष्पक्ष मूल्यांकन” के बाद लिया गया है।
बुलेटिन के अनुसार, यह फैसला Judges (Inquiry) Act, 1968 की धारा 3 के तहत सभापति को प्राप्त अधिकारों के आधार पर लिया गया।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के इस प्रस्ताव को लोकसभा के 130 सांसदों और राज्यसभा के 63 सांसदों का समर्थन प्राप्त था। यह पहली बार है जब चुनाव आयोग के प्रमुख के खिलाफ इस तरह का महाभियोग प्रस्ताव लाया गया।
10 पन्नों के इस नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त पर सात आरोप लगाए गए थे। इनमें पक्षपातपूर्ण व्यवहार, बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के आरोप, और चुनावों की निगरानी के दौरान उनके आचरण पर सवाल शामिल थे।
विपक्षी दलों ने विशेष रूप से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि बिहार जैसे पिछले चुनावों और पश्चिम बंगाल जैसे आगामी चुनावों में इस प्रक्रिया को सही तरीके से लागू नहीं किया गया। नोटिस में “सिद्ध कदाचार” और किसी विशेष राजनीतिक दल के प्रति झुकाव के आरोप भी लगाए गए।
यह पहल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेतृत्व में की गई, जब कई विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि वे पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहे हैं और SIR प्रक्रिया को मनमाने ढंग से लागू कर रहे हैं, जिससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा मिल सकता है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे रही हैं। वहीं, अन्य विपक्षी नेताओं ने भी अपने हमले तेज कर दिए हैं। राहुल गांधी ने “वोट चोरी” के आरोप लगाते हुए अभियान चलाया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने आगामी महत्वपूर्ण चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखे मतभेद सामने आ रहे हैं।
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