बकरीद से पहले बंगाल में पशु वध नियमों को हाईकोर्ट की मंजूरी, याचिकाएं खारिज

बकरीद (ईद-उल-अजहा) से पहले पश्चिम बंगाल सरकार के पशु वध संबंधी नए आदेश को Calcutta High Court से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने इस आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को खारिज..

बकरीद से पहले बंगाल में पशु वध नियमों को हाईकोर्ट की मंजूरी, याचिकाएं खारिज
22-05-2026 - 11:34 AM

बकरीद (ईद-उल-अजहा) से पहले पश्चिम बंगाल सरकार के पशु वध संबंधी नए आदेश को Calcutta High Court से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने इस आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को खारिज कर दिया।

बकरीद के मौके पर परंपरागत रूप से गाय, बकरे और भेड़ों की कुर्बानी दी जाती है। इसी को लेकर राज्य सरकार की नई गाइडलाइंस विवाद का कारण बनी थीं।

क्या है नया सरकारी आदेश?

13 मई को जारी अधिसूचना में राज्य सरकार ने कहा था कि गाय, बैल, भैंस और बछड़ों सहित किसी भी पशु का वध बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के नहीं किया जा सकेगा।

यह प्रमाणपत्र स्थानीय अधिकृत अधिकारियों और सरकारी पशु चिकित्सक (वेटरनरी सर्जन) द्वारा जारी किया जाएगा।

याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा?

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह नया आदेश 1950 के कानून और उसके तहत बनाए गए नियमों के खिलाफ है तथा अतिरिक्त शर्तें थोपता है।

हालांकि राज्य सरकार, Kolkata Municipal Corporation और पुलिस प्रशासन ने अदालत में आदेश का बचाव किया। उनका कहना था कि यह नोटिस केवल 2018 में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों को लागू करता है।

यह मामला “राज्यश्री चौधरी बनाम पश्चिम बंगाल सरकार” केस से जुड़ा था।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश Sujoy Paul की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने आदेश पर रोक लगाने या उसे रद्द करने से इनकार कर दिया।

अदालत ने कहा कि 2026 की अधिसूचना काफी हद तक 2018 के कोर्ट आदेश पर आधारित है और उस पुराने आदेश को कभी चुनौती नहीं दी गई, इसलिए वह अंतिम रूप ले चुका है।

पशु वध के लिए जरूरी होंगे ये नियम

अदालत ने अपने आदेश में दोहराया कि:

  • बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के किसी भी पशु का वध नहीं किया जा सकता।
  • प्रमाणपत्र नगर निकाय अध्यक्ष या पंचायत प्राधिकरण और पशु चिकित्सक संयुक्त रूप से जारी करेंगे।
  • यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पशु 14 वर्ष से अधिक उम्र का हो और उम्र, चोट या बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम न हो।

सार्वजनिक स्थानों पर वध पर रोक

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पशु वध केवल अधिकृत नगर निगम बूचड़खानों या स्थानीय प्रशासन द्वारा स्वीकृत स्थानों पर ही हो सकता है।

सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

आदेश में दो नई शर्तें जोड़ने के निर्देश

डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को 2026 की अधिसूचना में 2018 के आदेश से जुड़ी दो शर्तें जोड़ने का निर्देश दिया:

  1. सार्वजनिक स्थानों पर गाय और भैंस समेत किसी भी पशु की कुर्बानी या वध पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
  2. अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया जाए कि इस्लाम में गाय की कुर्बानी अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है। इसके लिए अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के “मो. हनीफ कुरैशी बनाम बिहार राज्य” फैसले का हवाला दिया।

प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने की जरूरत

अदालत ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया।

बेंच ने कहा कि पूरे पश्चिम बंगाल में पशु वध प्रमाणपत्र जारी करने और अधिकृत बूचड़खानों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। अदालत ने उम्मीद जताई कि इन कमियों को जल्द दूर किया जाएगा।

24 घंटे में फैसला लेने का निर्देश

कुछ याचिकाकर्ताओं ने आगामी धार्मिक त्योहार को देखते हुए छूट की मांग की थी। अदालत ने राज्य सरकार को इन मांगों पर 24 घंटे के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।

76 साल पुराने कानून का हवाला

अदालत ने कहा कि 76 वर्षों से लागू किसी कानून को संवैधानिक माना जाता है, जब तक कि उसे असंवैधानिक साबित न कर दिया जाए।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।