राजा वारिंग के ‘जातिसूचक बयान’ पर बवाल: SC आयोग ने मांगी रिपोर्ट, अकाली दल ने की FIR की मांग.. राहुल गांधी की पार्टी पर विपक्ष का हमला
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के कथित ‘जातिसूचक बयान’ पर अब विवाद गहराता जा रहा है। मामले पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने तरनतारण के डिप्टी कमिश्नर (DC) और सीनियर पुलिस अधीक्षक (SSP) को नोटिस जारी करते हुए 7 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) मांगी..
नयी दिल्ली। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के कथित ‘जातिसूचक बयान’ पर अब विवाद गहराता जा रहा है। मामले पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने तरनतारण के डिप्टी कमिश्नर (DC) और सीनियर पुलिस अधीक्षक (SSP) को नोटिस जारी करते हुए 7 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) मांगी है।
यह कदम आयोग ने भाजपा राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ के बयान पर आधारित एक समाचार रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान (suo motu cognisance) लेते हुए उठाया है।
संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत जांच के आदेश
आयोग ने कहा है कि उसने भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत मिले अधिकारों के अंतर्गत इस मामले की जांच शुरू करने का निर्णय लिया है।
आयोग ने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिला, तो वह अपने पास निहित नागरिक न्यायालय जैसे अधिकारों का प्रयोग करते हुए संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन जारी कर सकता है।
इस बीच, तरुण चुघ ने आयोग में कांग्रेस नेता के खिलाफ औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने कहा कि वारिंग ने अनुसूचित जाति समुदाय का अपमान किया है।
क्या कहा था राजा वारिंग ने?
राजा वारिंग ने 11 नवंबर को होने वाले तरनतारण विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार के दौरान पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री बुटा सिंह को लेकर टिप्पणी की थी।
उनके बयान के बाद अन्य राजनीतिक दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। हालांकि, विवाद बढ़ने पर वारिंग ने सफाई देते हुए कहा, “बुटा सिंह जी मेरे लिए पिता समान थे। मेरा किसी का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। यदि किसी को मेरी बात से ठेस पहुंची है, तो मैं निःशर्त माफी मांगता हूं।”
अकाली दल ने दर्ज कराई शिकायत – SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की मांग
शिअद (Shiromani Akali Dal) ने मंगलवार को तरनतारण SSP को लिखित शिकायत दी, जिसमें मांग की गई कि वारिंग के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत FIR दर्ज की जाए।
शिकायत में अकाली नेताओं गुलज़ार सिंह रानीके, बलजीत सिंह जलालुस्मा और राजविंदर सिंह धरमकोट ने लिखा, “वारिंग ने चुनावी सभा में बुटा सिंह और अनुसूचित जाति समुदाय के खिलाफ जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणियां कीं, जिससे समाज की भावनाएं आहत हुईं।”
उन्होंने मांग की कि उनके खिलाफ धारा 3 और 10-11 के तहत केस दर्ज हो। अकाली दल के SC प्रकोष्ठ ने इस बयान के विरोध में धरना प्रदर्शन भी किया।
मंत्री हरभजन सिंह ETO का बयान
पंजाब के मंत्री हरभजन सिंह ETO ने कहा कि वारिंग ने अपने “जातिवादी मानसिकता” का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि जिन बुटा सिंह का उन्होंने मज़ाक उड़ाया, वे बीए (ऑनर्स), एमए और पीएचडी की उपाधियाँ रखने वाले विद्वान थे, जिन्होंने पत्रकारिता से लेकर सांसद तक का लंबा सफर तय किया था।
उन्होंने कहा, “रंगभेद पर आधारित टिप्पणियां संविधान की भावना के खिलाफ हैं। ऐसे बयान कांग्रेस की दलित-विरोधी सोच को उजागर करते हैं। पार्टी हमेशा से भीमराव अंबेडकर के विरोध में रही है।”
मुख्यमंत्री भगवंत मान का हमला
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी कांग्रेस और उसके प्रदेश अध्यक्ष पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा, “राजा वारिंग ने जातिसूचक बयान दिया और अब माफी मांग रहे हैं। मैं उनके शब्द दोहरा भी नहीं सकता। कांग्रेस गरीब परिवारों से आए लोगों को आगे बढ़ते नहीं देख सकती, वे ऐसे लोगों को बर्दाश्त नहीं करते।” मान ने यह बयान AAP उम्मीदवार हरमीत सिंह संधू के लिए चुनाव प्रचार के दौरान दिया।
कांग्रेस का बचाव — “बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया”
पंजाब कांग्रेस ने कहा कि विपक्षी दल इस मुद्दे को “राजनीतिक रंग देने और तोड़-मरोड़कर पेश करने” की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस के SC विभाग के अध्यक्ष कुलदीप सिंह वैद और पूर्व विधायक पवन कुमार आदिया ने कहा, “राजा वारिंग का मकसद किसी का अपमान करना नहीं था। उन्होंने अपने भाषण में कांग्रेस की समावेशी सोच (Inclusiveness) को रेखांकित किया था, जो जाति, धर्म, रंग या समुदाय के आधार पर भेदभाव नहीं करती।”
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दल भाजपा, आप और अकाली दल जो आज बुटा सिंह की तारीफ़ कर रहे हैं, वही दल पहले उन्हें निशाना बनाते रहे हैं।
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