‘खट्टे अंगूर’ की राजनीति? भारत-ईयू एफटीए को ‘हद से ज्यादा प्रचारित’ बताने पर पीयूष गोयल का कांग्रेस पर पलटवार

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश की आलोचना पर जोरदार जवाब दिया। गोयल ने विपक्ष की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए समझौते को एक ऐतिहासिक, दोनों पक्षों के लिए लाभकारी (विन-विन) आर्थिक करार बताया, जो भारत के लिए बड़े पैमाने पर विकास और रोजगार के अवसर..

‘खट्टे अंगूर’ की राजनीति? भारत-ईयू एफटीए को ‘हद से ज्यादा प्रचारित’ बताने पर पीयूष गोयल का कांग्रेस पर पलटवार
30-01-2026 - 10:56 AM
30-01-2026 - 11:09 AM

नयी दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश की आलोचना पर जोरदार जवाब दिया। गोयल ने विपक्ष की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए समझौते को एक ऐतिहासिक, दोनों पक्षों के लिए लाभकारी (विन-विन) आर्थिक करार बताया, जो भारत के लिए बड़े पैमाने पर विकास और रोजगार के अवसर खोल सकता है।

जयराम रमेश के एक्स (X) पोस्ट—जिसमें एफटीए को “हद से ज्यादा प्रचारित” बताया गया था और व्यापार घाटा, कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म (CBAM), ऑटोमोबाइल, बौद्धिक संपदा और रिफाइंड ईंधन निर्यात पर चिंताएं जताई गई थीं—पर प्रतिक्रिया देते हुए गोयल ने कहा कि यह आलोचना राजनीतिक प्रेरणा से भरी है और आर्थिक वास्तविकताओं से कटी हुई है।

गोयल ने तंज कसते हुए पूछा, क्या यह ‘खट्टे अंगूर’ की कहानी है?” उन्होंने कहा कि जो लोग सत्ता में रहते हुए फैसले नहीं ले सके, वे अब कुछ न करने को ही गुण बताने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, 2013 से 2022 के बीच एफटीए वार्ताएं ठप रहने की भारत को भारी कीमत चुकानी पड़ी—नौकरियां, आय और विकास के अवसर गंवाने पड़े।

यह कहते हुए कि समझौते को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप गलत है, गोयल ने कहा कि करार का आकार और महत्व खुद बोलता है। उन्होंने कहा, जब पूरी दुनिया इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रही है, तब मेरे मित्र इसे हद से ज्यादा प्रचारित बता रहे हैं।” उन्होंने संयुक्त 25 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी, 11 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक व्यापार और करीब दो अरब लोगों के साझा बाजार की ओर इशारा किया। साथ ही कहा कि पहले ही दिन भारत के 33 अरब डॉलर के श्रम-प्रधान निर्यात पर शुल्क समाप्त होना किसी भी तरह से “हाइप” नहीं कहा जा सकता।

जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में तर्क दिया था कि यह एफटीए भारत द्वारा किसी भी साझेदार को दिया गया सबसे बड़ा व्यापारिक खुलापन है, जिसमें ईयू के 96 प्रतिशत से अधिक निर्यात पर शुल्क कटौती शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इससे ईयू से आयात दोगुना हो सकता है और व्यापार घाटा बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि ईयू के CBAM से भारत के एल्यूमिनियम और स्टील निर्यात को छूट नहीं मिली है; इन क्षेत्रों में निर्यात पहले ही 7 अरब डॉलर से घटकर 5 अरब डॉलर रह गया है और 1 जनवरी 2026 से CBAM लागू होने पर और गिरावट आ सकती है।

इस पर गोयल ने कहा कि सरकार ने CBAM और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर सक्रियता से बातचीत की है। उन्होंने कहा, मैं पूरे भरोसे से कह सकता हूं कि हमारी सरकार ने CBAM का मुद्दा उठाया है… और समाधान के रास्ते चिन्हित किए हैं,” तथा कठोर रुख के बजाय संवाद और सहयोग पर जोर दिया।

नियामकीय बाधाओं पर उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य और सुरक्षा मानक समझौते में सुरक्षित रखे गए हैं और उन्हें इस तरह अनुशासित किया गया है कि वे अनुचित व्यापार प्रतिबंध न बनें। बौद्धिक संपदा के संदर्भ में गोयल ने कहा कि दायित्व डब्ल्यूटीओ के ट्रिप्स (TRIPS) ढांचे के अनुरूप हैं—जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य लचीलापन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, भारत की परंपरागत डिजिटल ज्ञान लाइब्रेरी की मान्यता और डेटा एक्सक्लूसिविटी नीति का संरक्षण शामिल है।

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