कांग्रेस को दोहरी राहत: राहुल गांधी के विरुद्ध याचिका रद्द और पवन खेड़ा को मिली अंतरिम जमानत
कांग्रेस के दो प्रमुख नेताओं, लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi और पार्टी प्रवक्ता Pawan Khera को शुक्रवार को अलग-अलग मामलों में अदालतों से राहत..
कांग्रेस के दो प्रमुख नेताओं, लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi और पार्टी प्रवक्ता Pawan Khera को शुक्रवार को अलग-अलग मामलों में अदालतों से राहत मिली।
रायबरेली से लोकसभा सांसद राहुल गांधी को Allahabad High Court से राहत मिली, जिसने 2025 में दिए गए कथित विवादित बयान को लेकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को Supreme Court of India से अग्रिम जमानत मिली। यह मामला असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की पत्नी पर लगाए गए आरोपों से जुड़ा था, जिसे अदालत ने राजनीतिक गतिविधि से उत्पन्न प्रतीत होने वाला बताया।
राहुल गांधी पर क्या आरोप था?
राहुल गांधी के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि 2025 में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) कार्यालय के उद्घाटन के दौरान राहुल गांधी ने कहा था, "अब हम बीजेपी, आरएसएस और भारतीय राज्य (Indian State) से भी लड़ रहे हैं।"
याचिकाकर्ता के अनुसार, यह बयान जनभावनाओं को आहत करने वाला और देशविरोधी था, जिसका उद्देश्य देश को अस्थिर करना था।
न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने यह आदेश Hindu Shakti Dal से जुड़ी सिमरन गुप्ता की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया।
सिमरन गुप्ता ने संभल की निचली अदालत द्वारा उनकी याचिका खारिज किए जाने को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने 8 अप्रैल को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था और बाद में याचिका को खारिज कर दिया।
पवन खेड़ा के खिलाफ मामला क्या है?
पवन खेड़ा के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर—ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी।
खेड़ा ने आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास कई पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं।
अग्रिम जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक अत्यंत महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार है, और इससे वंचित करने के लिए उच्च स्तर का औचित्य होना चाहिए, खासकर जब मामले में राजनीतिक तत्व मौजूद हों।"
अदालत ने निर्देश दिया कि..
- गिरफ्तारी की स्थिति में खेड़ा को जमानत पर रिहा किया जाए
- वे जांच में सहयोग करें
- जरूरत पड़ने पर पुलिस के सामने उपस्थित हों
- सबूतों से छेड़छाड़ न करें
- बिना अदालत की अनुमति के देश न छोड़ें
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अग्रिम जमानत पर फैसला करते समय राज्य के हित और व्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन जरूरी है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है।
राहुल गांधी के लिए महत्वपूर्ण कानूनी जीत
राहुल गांधी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।
यह मामला 15 जनवरी 2025 को कांग्रेस के नए मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के उद्घाटन के दौरान दिए गए उनके बयान से जुड़ा था।
याचिकाकर्ता सिमरन गुप्ता ने इस बयान को राष्ट्रविरोधी बताया था। जब संभल की निचली अदालत ने उनकी शिकायत खारिज कर दी, तो उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका को कमजोर माना और खारिज कर दिया।
राहुल गांधी के बयान का विवरण
अपने भाषण में राहुल गांधी ने कहा था कि उनकी लड़ाई केवल बीजेपी या आरएसएस के खिलाफ नहीं बल्कि “भारतीय राज्य” के खिलाफ भी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और आरएसएस ने देश की सभी संस्थाओं पर नियंत्रण कर लिया है, जिससे मुकाबला अब निष्पक्ष नहीं रहा।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी की विचारधारा हजारों साल पुरानी है और वह इस वैचारिक संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध है।
उनके बयान में “Indian State” शब्द के उपयोग को ही उनके खिलाफ मामला दर्ज कराने की कोशिश का आधार बनाया गया था।
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