जयपुर में निकलेगी गणगौर माता की शाही सवारी
श्रावणी तीज और गणगौर राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का सबसे सुंदर और भव्य पर्व माने जाते है। राजधानी जयपुर में यह उत्सव खास शाही अंदाज में मनाया जाता है। चैत्र माह की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि परंपरा, आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम..
श्रावणी तीज और गणगौर राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का सबसे सुंदर और भव्य पर्व माने जाते है। राजधानी जयपुर में यह उत्सव खास शाही अंदाज में मनाया जाता है। चैत्र माह की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि परंपरा, आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम है। इस उत्सव के दौरान पूरा शहर राजस्थानी रंग में रंगा रहता है। लोकगीतों की मधुर धुन, महिलाओं की पूजा-अर्चना और पारंपरिक वेशभूषा इस त्योहार को और भी विशेष बना देती है। जयपुर की गणगौर देश-विदेश के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहती है।
जयपुर में गणगौर का उत्सव होली से चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि तक यानी सोलह दिनों तक पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इन दिनों दौरान महिलाएं और कुंवारी किशोरियां माता गौरी और भगवान ईसर की पूजा करती हैं। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं, वहीं कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। घरों में गणगौर की प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा की जाती है और रोजाना लोकगीत गाकर इस पर्व को शानदार बनाया जाता है।
शाही सवारी जयपुर की गणगौर की पहचान
जयपुर की गणगौर की सबसे बड़ी पहचान यहां निकलने वाली शाही सवारी है। पूर्व राजघराने की परंपरा के अनुसार राजपरिवार के निवास चंद्रमहल यानी सिटी पैलेस से गणगौर की भव्य शाही सवारी निकाली जाती है। इस सवारी के जुलूस में सजी-धजी ईसर और मां गौरी की प्रतिमाओं के साथ सुसज्जित घोड़े, ऊंट निकलते हैं। सवारी के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनें भी बजाई जाती हैं। इसे देखने के लिए हजारों लोग सड़कों पर उमड़ पड़ते हैं। यह शाही सवारी जयपुर की ऐतिहासिक परंपरा और सांस्कृतिक गरिमा को दर्शाती है।
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