यूरेनियम के ‘रसायनशास्त्र’ में भारत ने रचा इतिहास, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बना वैश्विक चर्चा का केंद्र
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाते हुए दुनिया को चौंका दिया है। Kalpakkam स्थित 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को पहली बार “क्रिटिकलिटी” हासिल कर ली..
नयी दिल्ली/कलपक्कम। भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाते हुए दुनिया को चौंका दिया है। Kalpakkam स्थित 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को पहली बार “क्रिटिकलिटी” हासिल कर ली है। इस उपलब्धि के साथ भारत, Russia के बाद दुनिया का दूसरा देश बन गया है, जिसने इस जटिल तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर सफलतापूर्वक विकसित किया है।
फास्ट ब्रीडर तकनीक क्या है
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर पारंपरिक परमाणु रिएक्टरों से अलग है। जहां सामान्य रिएक्टर यूरेनियम-235 को ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर उसे समाप्त कर देते हैं, वहीं यह उन्नत तकनीक इस्तेमाल किए गए ईंधन से नया ईंधन तैयार करती है। यही कारण है कि इसे “ब्रीडर” यानी ईंधन उत्पन्न करने वाला रिएक्टर कहा जाता है।
इस रिएक्टर में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग किया जाता है, जबकि इसके चारों ओर यूरेनियम-238 की परत होती है। रिएक्टर के संचालन के दौरान निकलने वाले तेज न्यूट्रॉन इस यूरेनियम-238 को प्लूटोनियम-239 में बदल देते हैं, जिससे रिएक्टर स्वयं नया ईंधन तैयार करता है।
ऊर्जा उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव
विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक पारंपरिक रिएक्टरों की तुलना में लगभग 60 गुना अधिक ऊर्जा उत्पादन की क्षमता रखती है। इससे भारत अपने सीमित यूरेनियम संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर सकेगा।
थोरियम आधारित भविष्य की राह
भारत के पास विश्व के कुल थोरियम भंडार का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन इसे सीधे सामान्य रिएक्टरों में उपयोग नहीं किया जा सकता। PFBR इस दिशा में “स्टेज-2” का महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में बदलने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इससे देश को दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल हो सकती है।
स्वदेशी तकनीक की बड़ी उपलब्धि
इस परियोजना का निर्माण BHAVINI द्वारा किया गया है, जिसमें 200 से अधिक भारतीय उद्योगों ने भागीदारी निभाई। Department of Atomic Energy के मार्गदर्शन में विकसित इस रिएक्टर को भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इसे “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में निर्णायक कदम बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि देश की वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरिंग कौशल का प्रमाण है।
प्रमुख विशेषताएं
- क्षमता: 500 मेगावाट, लगभग 5 लाख घरों को बिजली आपूर्ति
- ईंधन दक्षता: 1% से बढ़कर 60% तक
- कूलिंग सिस्टम: लिक्विड सोडियम, जिससे कम दबाव पर सुरक्षित संचालन
- पर्यावरणीय योगदान: 24 घंटे स्थिर बिजली आपूर्ति, Net Zero 2070 लक्ष्य में सहायक
आगे की प्रक्रिया
रिएक्टर अब कम क्षमता पर परीक्षणों के चरण से गुजरेगा, जिसके बाद इसे राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड से जोड़ा जाएगा।
निष्कर्ष
भारत की यह उपलब्धि न केवल ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करती है, बल्कि देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर भी तेजी से आगे बढ़ाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आने वाले दशकों में भारत को वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिला सकती है।
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