राजस्थान विधानसभा चुनावः टिकट वितरण में गहलोत, डोटासरा या पायलट में से किसकी चलेगी..? क्या है कांग्रेस की रणनीति?
<p><em>राजस्थान कांग्रेस में भी सियासी गहमा-गहमी बढ़ गयी है। अब चर्चाएं हो रही हैं कि इस बार किसके टिकट कटेंगे और किसको मिलेंगे। कांग्रेस भी किसी भी कमजोर उम्मीदवार पर कोई दांव खेलने को तैयार नहीं दिख रही है। स्पष्ट संदेश दिया गया है कि कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति टिकट चयन के लिए प्रदेश चुनाव समिति और स्क्रीनिंग कमेटी के भरोसे नहीं रहेगी।</em></p>
पार्टी का कहना है कि उन्हीं लोगों को टिकट दिया जाएगा जिनकी जीत की गारंटी हो। इसका सीधा सा अर्थ है कि इस बार राज्य के वरिष्ठ नेताओं की सिफारिशें काम नहीं आने वाली हैं। चुनाव समिति इस बार कम जन आधार वाले नेताओं को बिल्कुल टिकट नहीं देगी यानी इस बार कांग्रेस की केंद्रीय समिति ही चलने वाली है। एआईसीसी का पूरा दखल देखने को मिलेगा। पार्टी यह संदेश दे रही है कि इस बार विधानसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण ना गहलोत, ना पीसीसी प्रमुख गोविंद डोटासरा और ना ही सचिन पायलट में समन्यवय बिठाने के लिए टिकट बांटे जाएंगे।
राजस्थान में पिछले 25 वर्षों से परंपरा चली आ रही है कि चुनाव में एक बार तो एक बार भाजपा ही सत्ता में आती रही है। लेकिन, इस बार कांग्रेस इस पंरपरा को तोड़कर सत्तारूढ़ कांग्रेस की ही वापसी चाहती है। इस उद्देश्य के लिए कांग्रेस पार्टी हर सीट पर जीताऊ उम्मीदवारों की तलाश में है। यही वजह है कि कांग्रे की राजस्थान प्रदेश चुनाव समिति और स्क्रीनिंग कमेटी चुनाव लड़ने वाले इच्छुक नेताओं के बायोडाटा पर विचार करने के साथ व्यक्तिगत बातचीत करने में जुटी हुई है। इसके लिए एआईसीसी की ओर से सीनियर आब्जर्वर के रूप में मधुसूदन मिस्त्री को यह जिम्मेदारी सौंपी है जो अपने साथ वरिष्ठ नेताओं की अगुवाई में मंथन करने में जुटे हुए हैं।
टिकट वितरण में नहीं चलेगी कद्दावर नेताओं की सिफारिश
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी हाई कमान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि टिकट केवल जीताऊ उम्मीदवार को ही दिया जाएगा। साथ में यह भी स्पष्ट रूप से कहा है कि इस बार टिकट वितरण राजस्थान के किसी भी नेताओं की सिफारिश के आधार पर नहीं दिया जाएगा। कांग्रेस इस बार किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती है। इसका कारण है कि पिछली बार की गलतियों से सबक लेते हुए किसी सिफारिश को स्वीकार ना करने का फैसला किया गया है। पिछली बार पायलट और गहलोत के मनमुटाव के कारण राज्य ही बहुत सी सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार हार गए थे और फिर बाद में 13 निर्दलीय विधायकों के समर्थन से गहलोत सरकार बना सके थे। इनमें अधिकतर विधायक कांग्रेस के बागी विधायक थे।
कांग्रेस के ऑब्जर्वर मधुसूदन मिस्त्री को सौपेंगे अपनी रिपोर्ट
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की पहली लिस्ट को लेकर कांग्रेसी ऑब्जर्व्स लगातार माथापच्ची करने में लगे हैं और माना जा रहा है कि कांग्रेस के ये आब्जर्वर 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को मीटिंग में अपनी रिपोर्ट सीनियर ऑब्जर्वर मधुसूदन मिस्त्री को सौपे देंगे। इसी रिपोर्ट के बाद कांग्रेस की रणनीति में स्पष्टता आएगी। कौन सी सीट पर किसका नाम चर्चा में बना हुआ है? और कौन जीत हासिल कर सकता है और विभिन्न सीटों का फीडबैक क्या है? इसr आधार पर हाई कमान उम्मीदवार को टिकट देने या नहीं देने का फैसला करेगी। इस मीटिंग के बाद मधुसूदन मिस्त्री अपनी पूरी रिपोर्ट केंद्रीय चुनाव समिति में प्रस्तुत करेंगे।
गांधी जयंती के बाद विधानसभा सीटों के पैनल पर चर्चा
केंद्रीय चुनाव समिति के पास रिपोर्ट आने के बाद टिकट के उपयुक्त उम्मीदवार के चयन का काम शुरू हो जाएगा। इसके लिए 2 अक्टूबर के बाद प्रदेश इलेक्शन कमेटी अपना पैनल केंद्रीय चुनाव कमेटी को भेजेगी। इसमें एक सीट पर तीन नाम होंगे। इसके बाद केंद्रीय चुनाव समिति स्क्रीनिंग कमेटी और मधुसूदन मिस्त्री की टीम की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट पर चर्चा करेगी। इसके बाद विचार विमर्श कर उम्मीदवारों के टिकट का नाम फाइनल करेगी। माना जा रहा है कि कांग्रेस की पहली सूची 15 अक्टूबर तक ही जारी हो पाएगी।
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