यूपी: वाराणसी में बुर्का, मास्क या घूंघट पहनकर आये ग्राहकों को गहने नहीं बेचेंगे ज्वैलर, जानिए वजह..

उत्तर प्रदेश ज्वैलर्स एसोसिएशन (UPJA) के स्थानीय संगठन द्वारा चेहरा ढककर आने वाले ग्राहकों को गहने न बेचने के फैसले ने विवाद खड़ा कर दिया है। इस फैसले के तहत बुर्का, घूंघट, मास्क या हेलमेट पहनकर ज्वैलरी शॉप में प्रवेश करने वाले ग्राहकों को गहने नहीं बेचे जाएंगे। एसोसिएशन ने इस प्रतिबंध को सुरक्षा कारणों से जरूरी..

यूपी: वाराणसी में बुर्का, मास्क या घूंघट पहनकर आये ग्राहकों को गहने नहीं बेचेंगे ज्वैलर, जानिए वजह..
11-01-2026 - 11:26 AM

वाराणसी। उत्तर प्रदेश ज्वैलर्स एसोसिएशन (UPJA) के स्थानीय संगठन द्वारा चेहरा ढककर आने वाले ग्राहकों को गहने न बेचने के फैसले ने विवाद खड़ा कर दिया है। इस फैसले के तहत बुर्का, घूंघट, मास्क या हेलमेट पहनकर ज्वैलरी शॉप में प्रवेश करने वाले ग्राहकों को गहने नहीं बेचे जाएंगे। एसोसिएशन ने इस प्रतिबंध को सुरक्षा कारणों से जरूरी बताया है।

ज्वैलर्स एसोसिएशन के अनुसार, राज्य के कई जिलों में चोरी, लूट और धोखाधड़ी की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। जौहरियों का कहना है कि चेहरा ढंका होने की स्थिति में अपराध होने पर आरोपी की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

इस फैसले को लेकर UPJA के जिला अध्यक्ष कमल सिंह ने कहा, हम उन ग्राहकों को ज्वैलरी नहीं बेचेंगे, जिनका चेहरा ढंका हुआ होगा। अगर कोई व्यक्ति चेहरा ढककर अपराध करता है, तो उसकी पहचान संभव नहीं हो पाती। इसी कारण हमने दुकानों के बाहर पोस्टर लगाए हैं, जिनमें साफ लिखा है कि मास्क, बुर्का, हेलमेट या घूंघट पहनकर दुकान में प्रवेश वर्जित है।”

ज्वैलर्स ने स्पष्ट किया कि यह नीति केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि हिजाब पहनने वाली महिलाएं दुकान में आ सकती हैं लेकिन उन्हें अपना चेहरा खोलना होगा, ताकि दुकानदार और कर्मचारी खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। इस घोषणा के बाद वाराणसी के अलावा झांसी सहित कई अन्य जिलों की ज्वेलरी दुकानों के बाहर भी ऐसे नोटिस लगाए गए हैं।

UPJA के प्रदेश अध्यक्ष सत्य नारायण सेठ ने कहा कि अकेले वाराणसी में ही हजारों ज्वैलरी शॉप हैं और उनमें से कई दुकानदारों को चेहरा ढककर आने वाले ग्राहकों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन किसी भी धर्म का विरोध नहीं कर रहा है और यह फैसला पूरी तरह से जौहरियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम महिलाएं बुर्का पहनकर दुकान तक आ सकती हैं लेकिन दुकान में प्रवेश से पहले उन्हें बुर्का हटाना होगा, ताकि उनकी पहचान सुनिश्चित की जा सके।

हालांकि, इस फैसले की ज्वैलर्स समुदाय के भीतर से ही आलोचना भी हो रही है। लोहतिया (लोहता) क्षेत्र के ज्वैलर शाहिद ने कहा कि बुर्का पहनने वाली महिलाओं को दुकान में प्रवेश से रोकना अनुचित है और इससे व्यापार को नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसी महिला से बुर्का हटाने के लिए कहना अपमानजनक है और बुर्का पहनकर अपराध करने की घटनाएं बेहद दुर्लभ अपवाद हैं।

शाहिद ने दिसंबर 2025 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े एक पुराने विवाद का भी जिक्र किया, जब नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान एक महिला का नकाब हटाने पर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने कहा, अगर दुकान में कोई महिला कर्मचारी हो, तो वह महिला का चेहरा देख सकती है, लेकिन कोई पुरुष कर्मचारी किसी महिला से उसका बुर्का हटाने को नहीं कह सकता। यह ठीक नहीं है।”

वहीं, सरकारी अधिवक्ता राणा संजीव सिंह ने ज्वैलर्स के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम किसी के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता। सिंह ने बताया कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया और मीडिया में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें बुर्का पहनी महिलाएं सीसीटीवी फुटेज में ज्वैलरी चोरी करते हुए पकड़ी गईं लेकिन चेहरा ढका होने के कारण उनकी पहचान नहीं हो सकी।
उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और इस मामले में ज्वैलर्स की चिंताएं पूरी तरह जायज़ हैं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।