अश्विनी वैष्णव बोले कि भारत बनने जा रहा है दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था..!
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि अब समय आ गया है कि भारत भी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की तर्ज पर एक वैश्विक आर्थिक सम्मेलन की मेज़बानी करे। उन्होंने कहा कि निवेशकों के मजबूत भरोसे, लगातार ऊंची आर्थिक वृद्धि और पिछले 11 वर्षों में भाजपा-नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा किए गए सुधारों की वैश्विक स्तर पर मिली मान्यता..
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि अब समय आ गया है कि भारत भी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की तर्ज पर एक वैश्विक आर्थिक सम्मेलन की मेज़बानी करे। उन्होंने कहा कि निवेशकों के मजबूत भरोसे, लगातार ऊंची आर्थिक वृद्धि और पिछले 11 वर्षों में भाजपा-नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा किए गए सुधारों की वैश्विक स्तर पर मिली मान्यता को देखते हुए यह बिल्कुल उपयुक्त समय है।
एक निजी समाचार चैनल से बातचीत में वैष्णव ने कहा, “यह सुझाव सामने आया है कि अब वह समय आ गया है जब हमें भारत में ही वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसा आयोजन करना चाहिए—कुछ वैसा ही जैसे ‘ऑटम डावोस’। यह विचार ही हमारे देश और हमारी अर्थव्यवस्था की वैश्विक मान्यता को दर्शाता है।”
उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए “रिफॉर्म्स एक्सप्रेस” को लगातार समझ रहे हैं और उसकी सराहना कर रहे हैं। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (GST), परमाणु क्षेत्र को खोलने और अर्थव्यवस्था के लगभग हर क्षेत्र में किए गए संरचनात्मक सुधारों को इसका उदाहरण बताया।
वैष्णव ने कहा, “लोग मानते हैं कि निवेश की रफ्तार बहुत मजबूत है। भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है, जहां महंगाई नियंत्रण में है, सरकार की बैलेंस शीट बेहद स्वस्थ है और अर्थव्यवस्था में कर्ज का स्तर बहुत कम है।”
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले पांच वर्षों में भारत के वास्तविक (रियल) आधार पर 6-8 प्रतिशत और नाममात्र (नॉमिनल) आधार पर 10-13 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। यह वृद्धि नियंत्रित महंगाई और मजबूत घरेलू मांग के सहारे संभव होगी।
इससे पहले ‘बेट ऑन इंडिया—बैंक ऑन द फ्यूचर’ विषय पर आयोजित एक सत्र में, जो वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक के इतर भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और EY द्वारा आयोजित किया गया था, वैष्णव ने विकास को बनाए रखने के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस में हुए सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि टेलीकॉम टावर लगाने में लगने वाला औसत समय 270 दिनों से घटकर सिर्फ 7 दिन रह गया है और करीब 89 प्रतिशत अनुमतियां अब शून्य समय में मिल रही हैं।
उन्होंने राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली के बीच की खाई को पाटने की जरूरत पर भी बल दिया और कहा कि नौकरशाही को नीति दिशा के अनुरूप काम करने के लिए तैयार करना राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी है।
वैष्णव ने उद्योग जगत के भीतर बेहतर संवाद और समन्वय की भी वकालत की। उन्होंने अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में डेटा लोकलाइजेशन मानकों के एकरूपीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि वैश्विक परिचालन अधिक सुचारू हो सके।
उन्होंने कहा कि सुधारों की तेज़ रफ्तार, व्यापक आर्थिक स्थिरता और प्रशासनिक सरलीकरण ने भारत को ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है, जहां वह डावोस के स्तर और प्रतिष्ठा वाले वैश्विक आर्थिक मंच की विश्वसनीय मेज़बानी कर सकता है।
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