पाकिस्तान का दावाः भारत से युद्ध के बाद जेट विमानों के रिकॉर्ड ऑर्डर, 6 महीने में IMF की जरूरत नहीं पड़ेगी..!
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ हाल ही में सुर्खियों में तब आए, जब उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान को अगले 6 महीनों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की मदद की जरूरत नहीं पड़ेगी..
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ हाल ही में सुर्खियों में तब आए, जब उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान को अगले 6 महीनों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की मदद की जरूरत नहीं पड़ेगी।
आसिफ ने कहा कि मई 2025 में भारत के साथ हुए चार दिवसीय ‘मिनी-वॉर’ के बाद पाकिस्तान को रक्षा क्षेत्र में रिकॉर्ड ऑर्डर मिले हैं, जिनमें चीन निर्मित जेएफ-17 लड़ाकू विमान भी शामिल है।
जियो टीवी को दिए एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा, “हमारे विमानों का परीक्षण हो चुका है और हमें इतने ज्यादा ऑर्डर मिल रहे हैं कि पाकिस्तान को छह महीने में IMF की जरूरत नहीं पड़ेगी।”
उन्होंने भारत के साथ सैन्य टकराव के दौरान पाकिस्तान वायुसेना की भूमिका को “शानदार” बताया। आसिफ के अनुसार, चार दिन के इस सीमित युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पाकिस्तान के “दृढ़ संकल्प और सैन्य क्षमता” को प्रदर्शित किया।
केवल ख्वाजा आसिफ ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने भी दावा किया है कि बांग्लादेश ने पाकिस्तान से जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमान में “संभावित रुचि” जताई है। मंगलवार को इस्लामाबाद में बांग्लादेश वायुसेना प्रमुख हसन महमूद खान और उनके पाकिस्तानी समकक्ष जहीर अहमद बाबर सिद्धू के बीच मुलाकात हुई।
इसके अलावा, जेएफ-17 और जे-10 लड़ाकू विमानों के ऑर्डर अजरबैजान और लीबिया जैसे देशों से भी मिलने का दावा किया गया है।
वहीं भारत का कहना है कि 10 मई को पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) ने अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क कर युद्धविराम की मांग की थी। यह संपर्क भारतीय वायुसेना द्वारा किए गए उन हमलों के बाद हुआ, जिनमें पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेस को नुकसान पहुंचा था।
अब सवाल यह है कि ख्वाजा आसिफ के ये दावे हकीकत पर आधारित हैं या महज भ्रम का नतीजा हैं? पाकिस्तान के IMF की जरूरत न होने का दावा वास्तविकता से कोसों दूर नजर आता है। फिलहाल पाकिस्तान 7 अरब डॉलर के कड़े IMF बेलआउट कार्यक्रम के तहत है, जिसके तहत व्यापक संरचनात्मक सुधारों को लागू करना अनिवार्य है।
दिसंबर 2025 में पाकिस्तान को अपनी राष्ट्रीय विमानन कंपनी पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) को 4,300 करोड़ रुपये में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा था। IMF के दबाव में शहबाज शरीफ सरकार को इस एयरलाइन का निजीकरण करना पड़ा। इस बोली प्रक्रिया में आरिफ हबीब ग्रुप, पहले से चयनित तीन बोलीदाताओं में सबसे ऊंची बोली लगाने वाला समूह बनकर उभरा।
IMF ने कर्ज को राजकोषीय अनुशासन और सरकारी परिसंपत्तियों के विनिवेश से जोड़ा है। इतना ही नहीं, पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल के अनुसार, ख्वाजा आसिफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान सरकार 2026-27 के बजट के लिए IMF को मैक्रो-इकोनॉमिक और राजकोषीय मानकों में ढील देने के लिए मनाने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
"We are getting so many orders for JF 17 fighter jets that in six months we may not need to knock on the IMF’s door for loans. With both hands raised. we can say goodbye to the IMF" : PaK Def Min Khawaja Asif
Bhai ye wala nasha mujeh bhi chahiye pic.twitter.com/U3Uw9kXxqh — Naren Mukherjee (@NMukherjee6) January 8, 2026
वरिष्ठ पत्रकार आयशा सिद्दीका ने ख्वाजा आसिफ के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा, “ख्वाजा आसिफ कई ऐसे पत्रकारों की तरह बोल रहे हैं जो खुद को रक्षा मामलों का जानकार बताते हैं, लेकिन विमान के आगे और पीछे का फर्क तक नहीं जानते। जेएफ-17 थंडर विमान के एयरफ्रेम में पाकिस्तान की हिस्सेदारी सिर्फ करीब 35 प्रतिशत है। इससे इतनी कमाई नहीं हो सकती कि पाकिस्तान IMF से छुटकारा पा सके।”
वर्तमान में पाकिस्तान पर कुल सार्वजनिक कर्ज और देनदारियां लगभग 81 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (करीब 280–300 अरब डॉलर) हैं, जबकि बाहरी कर्ज करीब 26 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये है। वित्त वर्ष 2025 में केवल कर्ज की अदायगी पर ही पाकिस्तान को 8.9 ट्रिलियन रुपये खर्च करने पड़े, जो देश की कुल संघीय आय के आधे से भी अधिक है।
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