मद्रास हाईकोर्ट ने जस्टिस जीआर स्वामीनाथन को निशाना बनाने वाली कथित पुस्तक के प्रकाशन पर रोक लगाई

मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को एक तमिल भाषा की पुस्तक के प्रकाशन, वितरण और बिक्री पर रोक लगा दी, जो कथित तौर पर न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन को निशाना बनाती है। अदालत ने कहा कि यह प्रकाशन न्यायपालिका की गरिमा और संस्थागत अधिकार से जुड़े गंभीर सवाल खड़े..

मद्रास हाईकोर्ट ने जस्टिस जीआर स्वामीनाथन को निशाना बनाने वाली कथित पुस्तक के प्रकाशन पर रोक लगाई
08-01-2026 - 11:47 AM

चेन्नई। मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को एक तमिल भाषा की पुस्तक के प्रकाशन, वितरण और बिक्री पर रोक लगा दी, जो कथित तौर पर न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन को निशाना बनाती है। अदालत ने कहा कि यह प्रकाशन न्यायपालिका की गरिमा और संस्थागत अधिकार से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है।

न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन ने इससे पहले कार्तिगई दीपम पर्व के दौरान मदुरै स्थित तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर औपचारिक दीप प्रज्वलन की अनुमति दी थी। उनके इस आदेश को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस छिड़ गई थी।

मुख्य न्यायाधीश मणिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने न केवल पुस्तक के प्रकाशन पर रोक लगाई बल्कि पुस्तक प्रकाशित करने वाले कीझैकाट्रु पब्लिशर्स के खिलाफ स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) अवमानना कार्यवाही भी शुरू कर दी और किताब की प्रतियां जब्त करने का आदेश दिया।

विवादित पुस्तक का शीर्षक है, तिरुप्परनकुंद्रम घटना – जीआर स्वामीनाथन एक जज हैं या आरएसएस का गुंडा?’ यह पुस्तक 8 जनवरी 2026 से शुरू हो रहे चेन्नई बुक फेयर में जारी और बिक्री के लिए रखी जानी थी। सार्वजनिक वितरण की आशंका को देखते हुए अदालत ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगले आदेश तक यह पुस्तक मेले में प्रदर्शित या बेची न जाए।

सुनवाई के दौरान पीठ ने पुस्तक के शीर्षक और कवर पर दर्शाए गए चित्रों का अवलोकन किया और टिप्पणी की कि इसका प्रस्तुतीकरण किसी वैध आलोचना के बजाय एक मौजूदा न्यायाधीश का उपहास उड़ाने के उद्देश्य से किया गया प्रतीत होता है।

अदालत ने कहा कि न्यायिक फैसलों की आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन उकसावे वाली भाषा, व्यक्तिगत हमले और व्यंग्यात्मक या कार्टूननुमा चित्रण को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। बार एंड बेंच  की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी सामग्री न्यायपालिका की साख को नुकसान पहुंचा सकती है।

पीठ ने यह भी कहा कि किसी मौजूदा न्यायाधीश को लेकर इस तरह के प्रकाशन से जनता का न्यायपालिका पर भरोसा प्रभावित होता है और यदि इसे व्यापक रूप से प्रसारित होने दिया गया तो संस्था को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।

यह रिट याचिका अधिवक्ता पी. नवीनप्रसाद द्वारा दायर की गई थी, जिसमें पुस्तक के प्रकाशन और बिक्री पर रोक लगाने तथा इसकी प्रतियां जब्त करने की मांग की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि पुस्तक में कार्तिगई दीपम से जुड़े फैसले के आधार पर न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन को पक्षपाती और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का समर्थक के रूप में दर्शाया गया है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, पुस्तक का शीर्षक, भाषा और कवर डिजाइन “अपमानजनक, अभद्र और मानहानिकारकहै और इसका उद्देश्य न्यायपालिका के प्रति जनता के विश्वास को कम करना है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि 6 जनवरी को संबंधित अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद कोई निवारक कार्रवाई नहीं की गई।

आरोपों की गंभीरता और प्रकाशन की प्रकृति को देखते हुए हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए पुस्तक के प्रकाशन, वितरण और बिक्री पर रोक लगा दी है तथा मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।