डरने वाली नहीं हूं: उन्नाव बलात्कार पीड़ित ने कुलदीप सेंगर की जमानत के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया, सुप्रीम कोर्ट पर जताया भरोसा

2017 के उन्नाव बलात्कार मामले की पीड़ित ने शुक्रवार को कहा कि दोषी कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित करने के अदालत के आदेश से वह डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय पर “अंधा भरोसा” है और वह न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख..

डरने वाली नहीं हूं: उन्नाव बलात्कार पीड़ित ने कुलदीप सेंगर की जमानत के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया, सुप्रीम कोर्ट पर जताया भरोसा
27-12-2025 - 10:10 AM

नयी दिल्ली। 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले की पीड़ित ने शुक्रवार को कहा कि दोषी कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित करने के अदालत के आदेश से वह डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय पर “अंधा भरोसा” है और वह न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगी।

पीड़ित ने कहा कि उन्होंने उच्च न्यायालय के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया ताकि महिलाओं के लिए दिए जा रहे संदेश पर सवाल उठाया जा सके। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, “यह मेरा अधिकार है और जनता का भी अधिकार है कि हम ऐसे सवाल पूछें। हर जज ऐसा नहीं होता।”

उन्होंने कहा कि इस आदेश से उनके परिवार की सुरक्षा और आजीविका दोनों खतरे में पड़ गई हैं। पीड़िता ने कहा, “इस आदेश ने मुझे और मेरी जैसी कई महिलाओं को पिंजरे में कैद कर दिया है। इससे मेरे परिवार को खतरा है। मेरे पति की नौकरी भी चली गई है। हम आखिर क्या करें?”

देश की सर्वोच्च अदालत पर अपना भरोसा दोहराते हुए पीड़ित ने कहा कि वह इस आदेश को चुनौती देंगी। उन्होंने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और मुझे उस पर पूरा भरोसा है। सुप्रीम कोर्ट ने मुझे पहले भी न्याय दिया है और मुझे पूरा विश्वास है कि वह फिर से देगा।”

उन्होंने कहा कि डर उन्हें चुप नहीं करा सकता। पीड़ित ने कहा, “उन्हें लगा कि हम खामोश और भयभीत रहेंगे। उन्होंने एक महिला को उसके दुर्गा रूप में नहीं देखा है। हम डरने वाले नहीं हैं।”

इस मामले को महिलाओं के अधिकारों की व्यापक लड़ाई बताते हुए पीड़ित ने कहा, “यह इस देश की महिलाओं के लिए न्याय की लड़ाई है। हमें जेल में भी डाल दिया जाए, तब भी हम लड़ते रहेंगे।”

मंगलवार को उच्च न्यायालय ने कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया था, यह कहते हुए कि वह पहले ही लगभग सात साल और पांच महीने जेल में काट चुके हैं। यह निलंबन तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक उनकी दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ दायर अपील पर फैसला नहीं हो जाता। सेंगर को दिसंबर 2019 में ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया था।

अदालत ने कुछ शर्तें भी लगाईं, जिनमें सेंगर को पीड़ित के निवास स्थान के पांच किलोमीटर के दायरे में आने से रोकना और पीड़िता या उसकी मां को धमकाने पर पाबंदी शामिल है। अदालत ने कहा कि किसी भी शर्त के उल्लंघन पर जमानत स्वतः रद्द कर दी जाएगी।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को 2017 में, जब पीड़िता नाबालिग थी, उसका अपहरण करने और बलात्कार करने का दोषी ठहराया गया था। बलात्कार मामले और उससे जुड़े अन्य मामलों को 2019 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित किया गया था।

इस बीच, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित कर उन्हें जमानत दी गई थी।

जांच एजेंसी ने इस सप्ताह पारित विस्तृत आदेश का अध्ययन करने के बाद विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है, जिसमें उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।

हालांकि इस आदेश के बावजूद, सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेंगे, क्योंकि वह बलात्कार पीड़ित के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े एक अलग मामले में 10 साल की सजा भी काट रहे हैं।

सेंगर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसका सीबीआई और पीड़िता के परिवार ने कड़ा विरोध किया। एजेंसी ने बताया कि उसने विस्तृत जवाब और लिखित दलीलें दाखिल कीं, जबकि पीड़िता के परिवार ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और धमकियों के आरोप लगाए।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।