चौतरफा सियासी संकट, अध्यक्ष पर सस्पेंस... कांग्रेस चलेगी किस राह?
जिस पार्टी में महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, इंदिरा और राजीव गांधी जैसे नेताओं की मौजूदगी थी वह आज केंद्र की सत्ता में आने के लिए तरस रही है। आलम यह है कि राहुल गांधी के पद छोडऩे के बाद कोई नया अध्यक्ष नहीं मिल रहा है। पार्टी के नेता बगावत पर उतर आए हैं। गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, जयवीर शेरगिल और उससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेता पार्टी को अलविदा कह चुके हैं।
इन सबके बीच कांग्रेस 7 सितंबर से भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत करने जा रही है। इसमें 117 नेता शामिल होंगे जिसकी शुरुआत कन्याकुमारी से शुरू होगी और कश्मीर में खत्म होगी। 150 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में 12 राज्य और 2 केंद्र शासित प्रदेश शामिल होंगे। इसमें 117 नेताओं के शामिल होने की बात कही गई है। जयराम रमेश, पवन खेड़ा, युवा नेता कन्हैया कुमार, दिग्विजय सिंह सरीखे बड़े नेता राहुल गांधी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। 3500 किमी तक की यात्रा पैदल पूरी की जाएगी। इस यात्रा से कांग्रेस का संदेश साफ है कि वह भाजपा और संघ की विचारधारा से लोहा लेने के मूड में है। इसके अलावा वह देश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से लड़ रहे लोगों को अपने साथ मिलाना चाहती है। कांग्रेस की नजर 2024 के आम चुनाव पर है क्योंकि पार्टी 8 साल से सत्ता से बाहर है।
What's Your Reaction?