दीपावलीः अप्प दीपो भवः यानी अपना प्रकाश स्वयं बनें
<p><em><strong>भारत विविधताओं वाला देश है और दीपावली यहां का एक प्रमुख त्योहार। रोशनी के इस महापर्व के मनाये जाने के पीछे इतिहास के साथ आस्था और विश्वास भी जुड़े हुए हैं। विभिन्न प्रकार की मान्यताएं और परम्पराएं इस त्योहार को मनाने को लेकर.. </strong></em></p>
विविधताओं वाले देश भारत में दीपावली को लेकर विभिन्न प्रकार की मान्यताएं और परम्पराएं हैं। दीपावली रोशनी का त्योहार है और इसे केवल एक विशिष्ट संप्रदाय के लोग ही मनाते बल्कि इस त्योहार की विशेषता ही यही है कि उसे विभिन्न संप्रदायों में मनाया जाता है। इस त्योहार को मनाने के पीछे उनके अलग-अलग इतिहास, उनकी आस्था और विश्वास भी जुड़े हुए हैं।
सिक्खों में यह बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन ग्वालियर के किले में बंदी सिक्खों के छठवें गुरु हरगोबिंद को मुगल बादशाह जहांगीर ने मुक्त किया था । इस दिन को याद करने के लिए लोग अपने घर में दिये जलाते हैं । यद्यपि गुरु हरगोबिंद को जहांगीर ने बंदी बना रखा था लेकिन बाद में वे लोग अच्छे मित्र बन गए जब गुरु हरगोबिंद ने एक आक्रमणकारी शेर से जहांगीर की जान बचाई थी। यह कहा जाता है कि गुरु हरगोबिंद ने शेर के सामने कूद कर मुगल बादशाह के जान की रक्षा की थी। इसके बाद से गुरु हरगोबिंद जहांगीर के राजकीय अतिथि बन गए। यह घटना एक सच्चे व्यक्ति की बात बताती है। जिसका हृदय प्रेम से दैदीप्यमान मान होता है वह अपने दुश्मन की रक्षा भी कर सकता है और उसका मित्र भी बन सकता है। वास्तव में दीवाली तभी है जब आपका दिल रौशन हो ।
दिल ही चरागां बन जाए
फूल प्यार का खिल जाए
दिल में और कोई जज़्बात न हो
सिर्फ़ प्यार के सिवा कोई बात न हो
भेदभाव सब मिट जाएं
दिल ही चरागां बन जाए ।
दिवाली जैन धर्म में भी मनाया जाता है और उसके पीछे मान्यता है कि चौबीसवें तीर्थंकर महावीर जैन ने कार्तिक अमावस्या के दिन कैवल्य प्राप्त किया था और इसी घटना को एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है और दीप जलाया जाता है।
दीपावली को दीपदान उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। कहा जाता है गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त होने के बाद उनका यश पूरे भारत में फैल गया था। सम्पूर्ण भारत उनसे लाभान्वित हो रहा था। ऐसे में कपिलवस्तु की जनता ने राजा से प्रार्थना की कि यह तो चिराग तले अंधेरा वाली बात है कि जिस ज़मीन से बुद्ध हैं, वही उनके ज्ञान के प्रकाश से वंचित रह जाए। परिणाम स्वरूप गौतमबुद्ध को कपिलवस्तु आमंत्रित किया गया। बुद्ध के आने की खुशी में कपिलवस्तु की जनता ने दीपदान उत्सव मनाकर खुशी ज़ाहिर की।
सम्राट अशोक से दीप पर्व के संबंधित होने का ऐतिहासिक प्रमाण बौद्ध ग्रंथ दीप वंश में पाया जाता है। कहा जाता है कि 261 ईसा पूर्व में कलिंग युद्ध के बाद अपार जन धन की हानि के बाद सम्राट अशोक बहुत व्यथित थे। उन्होंने पूरे जंबू द्वीप अर्थात भारत में जगह-जगह स्मारक जैसे स्तूप, चैत्य और स्तंभ का निर्माण कराया जिसमें करीब तीन वर्ष लगे। इस कार्य के पूरे होने के बाद 258 ईसा पूर्व में पूरे जम्बू द्वीप में दीप जलाकर उत्सव मनाया गया ।
बुद्ध संप्रदाय से संबंधित एक और मान्यता यह भी है जिसके अनुसार बुद्ध के धम्म सेनानी महामोदगल्यायन की हत्या कार्तिक अमावस्या के दिन हो गई थी। सम्राट अशोक नहीं चाहते थे कि लोग एक बड़े विद्वान की शहादत पर दुखी हों और इसलिए सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार करने के लिए दीप जलाया गया।
इसी तरह प्रकार राजा बली से भी दीपावली का समबंध पाया जाता है जिसका उल्लेख अलबरूनी की किताब " किताब उल हिंद" में मिलता है । इस किताब के अनुसार भारत में यह माना जाता था कि राजा बलि सात पातालों में बंदी है और कार्तिक अमावस्या के दिन वे पृथ्वी पर एक दिन के लिए आते हैं। उनके आगमन पर लोग दीप जलाकर उनका स्वागत करते हैं। लेकिन, जनसामान्य में सबसे ज़्यादा प्रचलित जो बात है, वह यही है कि इस दिन प्रभु श्रीम लंका पर विजय प्राप्त करके वापस अयोध्या लौटे थे। प्रभूु श्रीराम के आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर अपनी ख़ुशी ज़ाहिर की थी ।
वैसे देखा जाए तो इस समय धान की फसल घर आ चुकी होती है और गेंहू की बुवाई शुरू होने वाली होती है। सही अर्थों में दीवाली एक फसली त्योहार है। गोवर्धन पूजा, अन्नकूट आदि नामों से यह प्रतीत भी होता है कि इस त्योहार का किसान संस्कृति से बहुत ही गहरा नाता है, जिसमें गो वृद्धि की बात होती है, सामूहिकता की बात होती है।
इस वर्ष यही उम्मीद करें कि तिमिर को मिटाने का त्योहार, मन का अंधेरा भी मिटायेगा और नया उजाला लायेगा और यह तभी सम्भव है जब अप्प दीपो भव होगा और सभी अपने दीपक बनेंगे। केवल दीपक ही न जलें बल्कि मन भी प्रकाशित हों। विविधता में एकता बनी रहे। सभी को दीपावली की शुभकामना।
What's Your Reaction?