तिथियों के हेर-फेर से असमंजस में ना रहें, अब भी समय है कर सकते हैं गोवर्धन पूजा
इस वर्ष दीपावली महापर्व के दौरान मनाये जाने वाले पर्वों को लेकर तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति रही है। दीपावली के दूसरे दिन यानी 25 अक्टूबर को हुए सूर्यग्रहण के कारण ने भी इस असमंजस को और बढ़ाया। आमतौर पर गोवर्धन पूजा कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को यानी दीपावली के अगले दिन की जाती है। चूंकि दीपावली के दूसरे दिन 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण के कारण मांगलिक या शुभ कार्य नहीं हो सकते थे इसलिए कुछ लोगों ने सूर्यग्रहण पश्चात् संध्याकाल में गोवर्धन पूजा की तो कुछ लोग आज 26 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा कर रहे हैं। इसी त्योहार के साथ लोग भाईदूज का भी त्योहार मना रहे हैं तो कुछ लोग भाई दूज 27 अक्टूबर को मनाएंगे।
हो सकता है कि कुछ लोगों को यह लगे कि गोवर्धन पूजा तो सुबह की जानी चाहिए तो उन लोगों के लिए अब भी समय बीता नहीं है। जो ब्रह्म मुहूर्त में पूजन नहीं कर सके, उनके लिए हम बता दें कि समय छूटा नहीं है। जब जागिये तब ही ही सवेरा है। अब भी अभिजित मुहूर्त सुबह 11:42 से दोपहर 12:27 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 01:57 से 02:42 बजे तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 05:42 से 06:07 बजे तक रहने वाला है। इस दौरान भी पूजा की जा सकती है।
गोवर्धन पूजा को देश के कुछ हिस्सों में अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। इस पावन दिन भगवान श्री कृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा- अर्चना की जाती है। गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण को 56 तरह के पकवानों का भोग भी लगाया जाता है।
ऐसे करें गोवर्धन पूजा
सबसे पहले घर के आंगन, चबूतरे पर या मुख्य द्वार के आगे गोबर से गोवर्धन का चित्र बनाएं। इसके बाद रोली, चावल, खीर, बताशे, जल, दूध, पान, केसर, फूल और दीपक जलाकर गोवर्धन भगवान की पूजा करें। कहा जाता है कि इस दिन विधि विधान से सच्चे दिल से गोवर्धन भगवान की पूजा करने से सालभर भगवान श्री कृष्ण की कृपा बनी रहती है। भगवान श्री कृष्ण की आरती करें।
ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से विशाल गोवर्धन पर्वत को छोटी उंगली में उठाकर ब्रज क्षेत्र के हजारों जीव-जतुंओं और इंसानी जिंदगियों को भगवान इंद्र के कोप से बचाया था। श्रीकृष्ण ने इन्द्र के घमंड को चूर-चूर कर गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी। इस दिन लोग अपने घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन बनाते हैं। कुछ लोग गाय के गोबर से गोवर्धन का पर्वत मनाकर उसे पूजते हैं तो कुछ गाय के गोबर से गोवर्धन भगवान को जमीन पर बनाते हैं।
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