एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार की नयी मीडिया गाइडलाइन प्रेस स्वतंत्रता कमतर करने वाला बताया
<p><em><strong>संपादकों की शीर्ष संस्था एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने सरकार के एक प्रस्तावित संशोधन पर चिंता जताई है और उसे प्रेस क स्वतंत्रता को कम करने वाला बताया है। </strong></em></p>
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) ने केंद्र सरकार द्वारा जारी नयी डिजिटल मीडिया गाइडलाइन को लेकर कहा है कि केंद्र सरकार का यह संशोधन सुनिश्चित करेगा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सहित सभी मध्यस्थ पत्र सूचना ब्यूरो की तथ्य जांच इकाई द्वारा ‘फेक’ के रूप में पहचान की गई हो, ऐसे किसी भी कंटेंट की परमीशन न दें।
गौरतलब है कि केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने मंगलवार को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधन पेश किया था। मीडिया एसोसिएशन की ओर से बुधवार यानी 18 जनवरी 2023 को ट्वीट किया गया है। इसमें एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने लिखा है कि “ईजीआई एमईआईटीवाई द्वारा किए गए आईटी नियमों 2021 में संशोधन से बहुत चिंतित है। यह समाचार रिपोर्टों की सच्चाई को सुनिश्चित करने के लिए पीआईबी को अधिकार देता है और ऑनलाइन प्लेटफार्म व सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर ‘फेक’ समझे जाने वाले कंटेंट को हटाने का निर्देश देता है। गिल्ड को लगता है कि यह सेंसरशिप के समान है। यह ‘मौलिक रूप से इंटरनेट पर काम करने वाले समाचार प्रकाशकों को प्रभावित करते है। यह देश में मीडिया की स्वतंत्रता को कम भी करेंगे।’
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के मुताबिक, फेक न्यूज का निर्धारण केवल सरकार के हाथों में नहीं हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप प्रेस की सेंसरशिप होगी। ईजीआई का कहना है कि तथ्यात्मक रूप से गलत पाए जाने वाले कंटेंट से निपटने के लिए पहले से ही कई कानून मौजूद हैं। यह नई प्रक्रिया प्रेस की आजादी को खत्म करेगी। उल्लेखनीय है कि आईटी मंत्रालय ने इन बदलावों को मंगलवार को जोड़ा है। संशोधन 17 जनवरी, 2023 को मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया था।
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