बजट पर बिफरे कर्मचारी संगठन... मांगें पूरी नहीं होने से आर-पार की तैयारी, 13 फरवरी को बुलाई महा बैठक
<p><em><strong>कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने बजट को कर्मचारी विरोधी बताते हुए सरकार को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।</strong></em></p>
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से भले ही राज्य कर्मचारियों के लिए कई घोषणाएं बजट में की गई हों लेकिन कर्मचारी संगठन मुख्यमंत्री के बजट से खुश नहीं है और इन्होंने बजट को कर्मचारी विरोधी बताया है। इतना ही नहीं, अब सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई का मोर्चा खोलने के लिए कर्मचारी संगठनों ने 13 फरवरी को राजधानी जयपुर में महाबैठक बुलाई है, जिसमें विभिन्न कर्मचारी संगठनों से जुड़े पदाधिकारी शामिल होंगे और बैठक में सरकार के खिलाफ आगामी रणनीति तैयार करेंगे।
सरकार को परिणाम भुगतने की चेतावनी
कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह बजट पूरी तरह से कर्मचारी विरोधी है। बजट से पहले मुख्यमंत्री ने जिस उत्साह के साथ कर्मचारी संगठनों के साथ संवाद किया था, उससे लग रहा था कि मुख्यमंत्री कर्मचारियों की मांगों को लेकर काफी संवेदनशील हैं लेकिन बजट पेश करने के बाद सरकार का असली चेहरा सामने आ गया है। कर्मचारी संगठनों से जुड़े नेताओं का कहना है कि जो मांगें सरकार से की गई थी वो बजट में पूरी नहीं हो पाई हैं, इसलिए अब 13 फरवरी को बैठक बुलाई गई है और उसमें सरकार के खिलाफ रणनीति बनेगी।
कर्मचारियों की थी यह प्रमुख मांगें
- वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए गठित सामंत कमेटी और खेमराज कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करना
- चयनित वेतनमान (एसीपी) का लाभ 9,18 व 27 वर्ष के स्थान पर 8, 16, 24 व 32 वर्ष पर पदोन्नति पद के समान देना
- मंत्रालयिक कर्मचारियों को सचिवालय कर्मचारियों के समान पदोन्नति लाभ देना।
- कांग्रेस के घोषणा पत्र-2018 के अनुरूप जनता जल योजना कर्मी, होमगार्ड, आंगनबाड़ी कर्मियों, सीसीडीयू एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अंशकालीन रसोइये व चैकीदार, संविदा कर्मियों, एनआरएचएम एवं एनयूएचएम कर्मियों, पैरा टीचर्स, उर्दू पैरा टीचर्स, लोक जुंबिश कर्मियों, शिक्षाकर्मियों, विद्यार्थी मित्रों, पंचायत सहायकों, प्रेरक, वनमित्र, कृषि मित्र, चिकित्सा कर्मी, एंबुलेंस कर्मचारी, कंप्यूटर ऑपरेटर, संविदा फार्मासिस्ट, मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना में लगाए गए लैब टेक्नीशियन एवं लैब अटेंडेंट, आईटीआई संविदा कर्मी एवं पशुपालन विभाग के पशुधन सहायक आदि सभी अस्थाई कर्मचारियों को नियमित करना।
- कर्मचारियों के लिए स्पष्ट एवं पारदर्शी स्थानांतरण नीति बनाना।
- ग्रामीण भत्ता 10ः स्वीकृत करना।
- केंद्र के अनुरूप राज्य में एमटीएस का पद सृजित करना।
- अर्जित अवकाश की सीमा 300 दिवस से बढ़ाकर सेवानिवृत्ति तक जोड़ना।
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