खालिस्तानी पन्नू को क्यों बचा रहा है इंटरपोल? भारत की रेड कॉर्नर नोटिस की ठुकराई
<p><em><strong>संगठन ने पन्नू के आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त होने के पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कही है</strong></em></p>
अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल ने खालिस्तानी आतंकवादी गुरुपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ रेड नोटिस जारी करने की भारत की अपील ठुकरा दी है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि संगठन ने पन्नू के आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त होने के पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कही है। उसने अपने दलीलों में इंटरपोल के संविधान के आर्टिकल 3 का भी हवाला दिया है। इंटरपोल का कहना है कि चूंकि भारत गुरुपतवंत सिंह पन्नू को आतंकवादी साबित नहीं कर सका इसलिए आर्टिकल 3 की बाध्यताओं के कारण उसके खिलाफ नोटिस जारी नहीं की जा सकती है।
कैसे जारी होता है इंटरपोल का नोटिस
जब किसी सदस्य देश को अन्य सदस्य देशों की पुलिस से गंभीर किस्म के अपराध संबंधी सूचनाएं साझा करने की अपील करनी होती है तो इंटरपोल नोटिस का सहारा लिया जाता है। इस तरह इंटरपोल नोटिस सहयोग या सतर्कता के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुरोध है जो स्वीकृत हो जाने पर सदस्य देशों में पुलिस को महत्वपूर्ण अपराध-संबंधी जानकारी साझा करने की अनुमति देता है।
क्या है इंटरपोल के संविधान का आर्टिकल 3, जानें
नोटिस तभी प्रकाशित की जाती है जब यह इंटरपोल के संविधान और आवेदन की प्रक्रिया के नियमों एवं शर्तों के अनुरूप हो। इसमें उदाहरण के तौर पर बताया गया है कि अगर इंटरपोल के संविधान के आर्टिकल 3 का उल्लंघन हो तब नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। आर्टिकल 3 इंटरपोल को किसी राजनीतिक, सैन्य, धार्मिक या नस्लीय मामलों से जुड़ी गतिविधियों में हस्तक्षेप करने से मना करता है।
इंटरपोल नोटिस जारी करने की यह शर्त भी जान लें
इंटरपोल का प्रावधान कहता है कि आवेदन करने वाले देश की अदालत से जारी हुआ गिरफ्तारी का आदेश रेड नोटिस जारी करने का कानूनी आधार माना जाएगा। आगे कहा गया है कि जिस किसी के खिलाफ इंटरपोल नोटिस जारी होता है, वह तब तक निर्दोष माना जाएगा जब तक अदालत उसे दोषी करार नहीं दे दे।
नोटिस जारी होने का मतलब
ध्यान रहे कि इंटरपोल की स्थापना वर्ष 1923 में हुई थी जिसका मुख्यालय फ्रांस के लियोन शहर में है। भारत इस अंतरराष्ट्रीय संस्था से 1949 में ही जुड़ गया था। इस तरह भारत का नाम इंटरपोल के सबसे पुराने सदस्य देशों की सूची में शामिल है। इसी महीने इंटरपोल का दो दिवसीय सम्मेलन दिल्ली में होने जा रहा है जिसमें 195 सदस्य देश हिस्सा लेंगे।
कौन है पन्नू जिस पर इंटरपोल है मेहरबान
गुरुपतवंत सिंह पन्नू पर आतंकवादी और देशद्रोही गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोपों में कुल 22 मामले दर्ज हैं। वह प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस का कानूनी सलाहकार है। पन्नू अभी कनाडा में रहता है। भारत सरकार ने 1 जुलाई 2020 को गुरुपतवंत सिंह को यूएपीए कानून के तहत आतंकवादी घोषित किया था। जुलाई 2020 में ही पंजाब पुलिस ने भी उसके खिलाफ अमृतसर और कपूरथला में राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करवाया था। गुरुपतवंत सिंह पन्नू पंजाब से अलग खालिस्तान प्रांत बनाने के लिए आतंकी गतिविधियों को हवा देने में जुटा है। फिर भी इंटरपोल उसे अपना नोटिस जारी किए जाने के योग्य नहीं मानता।
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