दफा 302 नहीं,नए संशोधनों के साथ अब दफा 99 , केंद्र सरकार ने 3 नए विधेयक पेश किए
<p>भारतीय दंड संहिता (IPC) को भारतीय न्याय संहिता (BNS) में तब्दील किया जाएगा। अपराध प्रक्रिया संहिता (CrPC) को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारत साक्ष्य अधिनियम (IAA) को भारतीय साक्ष्य (BS) कर दिया जाएगा। तीनों बिलों अब समीक्षा के लिए स्थाई समिति को भेजा गया है। अमित शाह ने कहा कि हम इन कानूनों को खत्म करने जा रहें हैं। ये कानून अंग्रेजों द्वारा लाए गए थे।</p>
तीन बिल में क्या बदलाव हुए,जानें
CrPC:
इसमें 160 धाराओं को बदल दिया गया है। अब इसमें 533 धाराएं बचेंगी। 9 नई धाराएं जोड़ी गई है, 9 को हटाया गया है।
IPC:
बॉलीवुड फिल्मों में आपने दफा 302 का जिक्र तो ज़रूर सुना होगा फिल्मों में, आम बोलचाल की भाषा में सब IPC से भलीभांति परिचित हैं। 160 साल से अधिक पुरानी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) हत्या यानी मर्डर के बारे में है। लेकिन अब केंद्र द्वारा प्रस्तावित ओवरहॉल में न सिर्फ आईपीसी का नाम बदल दिया गया है बल्कि दफ़ाएं भी बदल दी गई हैं। अब 302 मर्डर का पर्याय नहीं रहेगा।
पहले 511 धाराएं थीं, अब 356 धाराएं होंगी। 8 नई धाराएं जोड़ी गई हैं और 22 को खत्म कर दिया गया है।
साक्ष्य अधिनियम:
इसमें पहले 167 धाराएं थीं। अब 170 धाराएं होंगी। 23 में बदलाव हुआ है। एक नई धारा जुड़ गई है। 5 को खत्म कर दिया गया है।
IPC के सेक्शन में नए नंबर
आईपीसी की कुछ सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली दफाओं यानी सेक्शनों के लिए नए नंबर शामिल किये गए हैं।
मर्डर के लिए अब नई दफा
आईपीसी में हत्या के लिए "दफा 302" थी लेकिन बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) में हत्या के लिए सेक्शन 98 और 99 में जिक्र किया गया है।
दफा 98 : गैर इरादतन हत्या
बीएनएस की दफा 98 गैर इरादतन हत्या के बारे में है। दफा 99 कहती है कि : "जो कोई मृत्यु करने के आशय से कोई कार्य करके मृत्यु कारित करता है। या इस इरादे से ऐसी शारीरिक चोट पहुंचाता है जिससे मृत्यु होने की संभावना हो, या यह जानते हुए कि ऐसे कृत्य से मृत्यु कारित होने की संभावना है, वह व्यक्ति हत्या का दोषी होने वाला अपराध करता है।
दफा 99 : हत्या
इस दफा के अंतर्गत कहा गया है कि -
- किसी की मौत करने के इरादे से कोई काम करना ।
- ऐसी शारीरिक चोट पहुंचाना जिसके बारे में अपराधी को पता हो कि इससे व्यक्ति की मृत्यु होने की संभावना है।
- यदि वह कार्य या शारीरिक चोट जो प्रकृति के सामान्य क्रम में मृत्यु का कारण बनती है और ऐसा कार्य करने वाला व्यक्ति जानता है यह इतना आसन्न रूप से खतरनाक है और पूरी संभावना है कि यह मृत्यु का कारण बन सकता है, या ऐसी किसी शारीरिक क्षति का कारण बन सकता है ऐसी चोट जिससे मृत्यु होने की संभावना हो तो वह हत्या है।
हत्या की सज़ा
बीएनएस के अनुसार, हत्या की सज़ा के लिए दिए सेक्शन 101. (1) में कहा गया है कि -
"जो कोई भी हत्या करेगा उसे मौत या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी देना होगा।"
(2) में कहा गया है कि जब पाँच या अधिक व्यक्तियों का एक समूह सामूहिक रूप से नस्ल, जाति या समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या कोई अन्य आधार पर हत्या कर देता है तो ऐसे समूह के प्रत्येक सदस्य को मृत्युदंड या आजीवन कारावास या कम से कम सात साल के कारावास की सज़ा से दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
सेक्शन 102
सेक्शन 102 कहता है कि जो कोई आजीवन कारावास की सजा के अधीन रहते हुए हत्या करेगा, उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसका मतलब उस व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन के शेष भाग तक कारावास होगा।
सेक्शन 103
जो कोई गैर इरादतन हत्या करेगा, उसे आजीवन कारावास, या किसी अवधि के लिए कारावास, जो पाँच वर्ष से दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है
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