'देशभक्ति इतनी मुश्किल क्यों?' - ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस के भीतर उठे सवालों पर सलमान खुर्शीद का पलटवार
विदेशों में "ऑपरेशन सिंदूर" के तहत भारत की ओर से भेजे गए बहु-दलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने सोमवार को उन आलोचकों को आड़े हाथों लिया..
नयी दिल्ली। विदेशों में "ऑपरेशन सिंदूर" के तहत भारत की ओर से भेजे गए बहु-दलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने सोमवार को उन आलोचकों को आड़े हाथों लिया जो विपक्षी नेताओं की देशभक्ति और राजनीतिक निष्ठा पर सवाल उठा रहे हैं।
क्या है मामला?
सलमान खुर्शीद उन सांसदों में शामिल हैं जो जेडीयू सांसद संजय झा की अगुवाई में इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान और सिंगापुर के दौरे पर हैं। यह दौरा "ऑपरेशन सिंदूर" के तहत भारत की आतंकवाद के खिलाफ कूटनीतिक मुहिम का हिस्सा है।
सलमान खुर्शीद का तीखा जवाब
X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए खुर्शीद ने बिना किसी का नाम लिए लिखा, "जब आतंकवाद के खिलाफ भारत का संदेश लेकर मिशन पर निकले हैं, तो यह देखकर दुख होता है कि देश में कुछ लोग राजनीतिक निष्ठा की गिनती कर रहे हैं। क्या देशभक्त होना इतना मुश्किल है?"
कांग्रेस के अंदर उठे सवाल
- कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं, विशेष रूप से जयराम रमेश, ने इस मिशन पर कांग्रेस सांसदों की भागीदारी पर अप्रसन्नता जताई थी।
- रमेश ने तंज कसा: "हमारे सांसद घूम रहे हैं और आतंकी भी घूम रहे हैं।"
खुर्शीद का ANI से बयान
सलमान खुर्शीद ने कहा, "लोग पूछते हैं कि आप उस प्रतिनिधिमंडल में क्या कर रहे हैं जहां बीजेपी के लोग भी हैं। तो मेरा जवाब है - हम वो कर रहे हैं जो देश के लिए जरूरी है। आज की जरूरत है कि हम सब एक स्वर में देश की बात करें, चाहे हम किसी भी पार्टी से हों।"
"देश के लिए कुछ करने की कोशिश हो रही है, और ऐसे में जो लोग ट्वीट कर रहे हैं और उल्टे-सीधे बयान दे रहे हैं, उनसे पूछना चाहिए - क्या देशभक्ति वाकई इतनी मुश्किल हो गई है?"
पृष्ठभूमि: ऑपरेशन सिंदूर क्या है?
- यह एक राजनयिक पहल है जिसके तहत भारत दुनियाभर में आतंकवाद के खिलाफ मजबूत जनमत बना रहा है।
- इसमें संसद के सभी दलों के नेताओं को शामिल किया गया है ताकि एक 'राष्ट्रीय एकता का संदेश' दिया जा सके।
राजनीतिक विश्लेषण
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पक्ष |
विचार |
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कांग्रेस के आलोचक |
इसे सरकार की छवि चमकाने वाला कार्यक्रम मान रहे हैं जिसमें विपक्ष की भूमिका को लेकर असहजता है। |
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समर्थक पक्ष |
मानते हैं कि आतंकवाद जैसे मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और विपक्ष को राष्ट्रहित में भाग लेना चाहिए। |
सलमान खुर्शीद का यह बयान न सिर्फ कांग्रेस के अंदर की नाराज़गी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आतंकवाद जैसे गंभीर विषय पर भी भारत में राजनीतिक मतभेद सामने आ रहे हैं। ऐसे समय में, उनका यह सवाल—"क्या देशभक्त होना इतना मुश्किल है?"—सिर्फ पार्टी के भीतर नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक विमर्श के लिए सोचने का विषय बन गया है।
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