जोशीमठ की भांति जम्मू-कश्मीर के डोडा में भी भूधंसाव से मकानों में दरारें, ढहने लगे मकान..मुस्तैद प्रशासन ने शुरू किये राहत कार्य
<p><em>भूमि धंसने की समस्या केवल उत्तराखण्ड के जोशीमठ में ही नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर में डोडा जिले के एक गांव में भी देखने को मिल रही हैं। यहां के डोडा जिले में किश्तवाड़-बटोटे राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट थाथरी के नयी बस्ती गांव के कई घरों में दरारें दिख रही हैं। हालांकि आमजन इन दरारों को उत्तराखंड के जोशीमठ में हुए भूधसांव जा ही बता रहे हैं लेकिन जम्मू-कश्मी के उपराज्यपाल (एलजी) मनोज सिन्हा का कहना है कि डोडा के हालात की तुलना जोशीमठ की दरारों के साथ नहीं की जा सकती।</em></p>
एलजी मनोज सिन्हा ने बताया है, डोडा के इस गांव की दरारें और जोशीमठ की दरारों और उनके कारणों बड़ी अंतर है। इसके बावजूद जम्मू-कश्मीर प्रशासन सक्रिय है और हालात पर निगाह रख रहा है। फिलहाल प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने को लेकर तैयार है। उन्होंने बताया, ‘सभी प्रभावित घरों को खाली करा लिया गया है और बहुत घबराने की जरूरत नहीं है। प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है और (पुनर्वास के लिए) हरसंभव कदम उठाए जाएंगे।’ यह पूछे जाने पर कि क्या प्रभावित गांव में जोशीमठ जैसी स्थिति है, उपराज्यपाल ने कहा, ‘बिल्कुल नहीं।’
उल्लेखनीय है कि नयी बस्ती गांव के कुछ घरों में कुछ दिन पहले दरारें देखने को मिली थीं लेकिन गुरुवार को भूस्खलन से स्थिति और खराब हो गई और प्रभावित मकानों की संख्या 21 तक पहुंच गई। जानकारी यह भी है कि यहां दरारें आने के बाद 3 घर ढह गए जबकि 18 अन्य घर असुरक्षित पाए गए हैं। इसके चलते इस गांव के ज्यादातर घरों को खाली करवा लिया गया है और लोगों को राहत शिविरों में भेजा जा रहा है।
कुछ अपने मकानों को छोड़कर नहीं जा रहे हैं। ऐसे में जम्मू-कश्मीर पुलिस इन परिवारों को समझाने में जुटी है कि यहां बेहद ज्यादा खतरा है। पुलिस लोगों को समझा रही है, ‘यहां पर लगातार हो रहे भूधंसाव की वजह से किसी भी समय कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है इसीलिए एहतियातन यहां से चले जाएं।’
वहीं इस घटना से प्रभावित जाहिदा बेगम ने कहा कि वह 15 साल से गांव में रह रही हैं और घरों में दरारें देखकर हैरान हैं. उन्होंने प्रभावित परिवारों के उचित पुनर्वास की मांग करते हुए कहा कि गांव में 50 से अधिक परिवारों में घबराहट है। गुरुवार के भूस्खलन के बाद अधिकतर घरों में दरारें आ गईं।
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