दक्षिण में बढ़ा एनडीए का कुनबा, तमिलनाडु में पीएमके के साथ गठबंधन से भाजपा को कितना होगा फायदा?

<p><em>तमिलनाडु में ऑल इंडिया द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईडीएमके) से रिश्ता टूटने के बाद से ही BJP&nbsp;को तमिलनाडु में नए सहयोगियों की तलाश है। ऐसे में सवाल ये है कि PMK के साथ आने से भारतीय जनता पार्टी को क्या फायदा होगा।</em></p>

दक्षिण में बढ़ा एनडीए का कुनबा, तमिलनाडु में पीएमके के साथ गठबंधन से भाजपा को कितना होगा फायदा?
20-03-2024 - 07:23 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

भारतीय जनता पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए अपनी ताकत दक्षिण के 5 राज्यों में झोंकने की तैयारी कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 दिन के दक्षिण भारत के दौरे पर हैं। तमिलनाडु में ताकत बढ़ाने के लिए नए सहयोगियों की तलाश में निकली BJP को एक बड़ी कामयाबी मिली है। क्षेत्रीय दल पट्टाली मक्कल काची यानी PMK मंगलवार को NDA में शामिल हो गया। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने सलेम की रैली में PMK प्रमुख डॉ. एस. रामदास अंबुमणि की मौजूदगी में इसका ऐलान किया। इस समझौते के तहत राज्य की 39 लोकसभा सीटों में से PMK 10 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
तमिलनाडु में ऑल इंडिया द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईडीएमके) से रिश्ता टूटने के बाद से ही  भाजपा को तमिलनाडु में नए सहयोगियों की तलाश है। रामदास अंबुमणि ने कहा कि तमिलनाडु की जनता बदलाव की उम्मीद कर रही है और इसे पूरा करने के लिए हमने एनडीए के साथ जाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि हमारा गठबंधन सिर्फ तमिलनाडु ही नहीं बल्कि पूरे भारत में भारी जीत हासिल करेगा और पीएम मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनेंगे। इससे पहले (एआईडीएमके) भी पीएमके से गठबंधन चाहती थी। ऐसे में सवाल ये है कि पीएमके के साथ आने से भारतीय जनता पार्टी को क्या फायदा होगा।
तमिलनाडु में पीएमके कितनी खास?
- पीएमके का उत्तरी तमिलनाडु के 6 जिलों में खासा असर है। अति पिछड़े वण्णियार समुदाय में पीएमके की पैठ है। राज्य की करीब 6 प्रतिशत वोटों पर पीएमके की पकड़ है।
- 11 लोकसभा सीटों सलेम, धर्मपुरी, विल्लुपुरम, कुडलोर, थिरुवन्नमलाई, वेल्लोर, आरणी, कल्लाकुरिचि, पेरांबलुर, नमक्कण और चिदंबरम पर पीएमके का असर है।
-2019 के लोकसभा चुनाव में पीएमके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ थी और उसे 5.3 प्रतिशत वोट मिले। हालांकि, 2021 विधानसभा चुनाव में पीएमके का वोट प्रतिशत घट कर 3 फीसदी रह गया।
-वहीं, बीजेपी की बात करें, तो उसे 2019 लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में 3.6 प्रतिशत वोट मिले। 2021 विधानसभा चुनाव में सिर्फ 2.3 फीसदी वोट मिले थे
भाजपा को होगा क्या फायदा?
तमिलनाडु में एआईडीएमके और डीएमके सबसे बड़े दल हैं। उसमें कोई बदलाव नहीं है। एआईडीएमके और डीएमके के सामने अब कर कोई भी पार्टी (थर्ड फ्रंट के रूप में) सीट नहीं जीत पाई है। हालांकि, वो वोट शेयर में भी सिर्फ 10 पर्सेंट तक पहुंच पाए। ये तमिलनाडु के सियासी इतिहास की सच्चाई है। अब बात भाजपा और पीएमके के गठबंधन की करें, तो पीएमके का वोट शेयर कई सीटों पर अच्छा है। माना जाता है कि पीएमके का वोट शेयर सिर्फ 5 फीसदी का है लेकिन कुछ क्षेत्रों में ये काफी गुना ज्यादा हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पीएमके-भाजपा के अलायंस में ऐसे भी नेता हैं, जिनका राज्य की राजनीति में अच्छा प्रभाव है। जैसे ओ पनीर सेल्वम, वर्ष 2019 के चुनाव में ओ पनीर सेल्वम के बेटे ही एकमात्र सीट जीत पाए थे। इस गठबंधन से भाजपा ऐसे कुछ सीटों पर वोटों को इकट्ठा कर पाएगी।
दक्षिण में बढ़ता एनडीए का कुनबा
लोकसभा चुनाव 2024 में एनडीए के घटक दल 400 सीटें जीतने का नारा दे रहे हैं। इस नारे को अमलीजामा पहनाने के लिए भाजपा गठबंधन का विस्तार करने में जुटी है। भाजपा,एनडीए को दक्षिण भारत तक ले जाना चाहती है। इसी सिलसिले में एनडीए ने आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू से गठबंधन किया है। इसके साथ ही पार्टी तेलंगाना और केरल में अपना जनाधार बढ़ाने में जुटी हुई है।
खुद पीएम मोदी मिशन साउथ को पूरा करने में लगे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी 50 बार तमिलनाडु का दौरा कर चुके हैं। इस साल जनवरी से अभी तक पीएम मोदी ने दक्षिण भारतीय राज्यों के 20 से अधिक दौरे किए हैं।
अभी दक्षिण भारत में बीजेपी की क्या है स्थिति?
केरल में पिछले 3 लोकसभा चुनाव की बात करें, तो यहां छक्। को एक भी सीट नहीं मिली। तमिलनाडु में सहयोगी पार्टी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के अलग होने के बाद एनडीए अलग-थलग पड़ गई है। तेलंगाना में 2019 के लोकसभा चुनाव में ठश्रच् ने 4 सीटें जीती थीं, लेकिन 2023 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद यहां कांग्रेस मजबूत नजर आ रही है।

 

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।