डेनमार्क में कुरान और इराकी झंडा जलाया: बगदाद में भड़के लोगों ने ग्रीन जोन पर किया हमले का प्रयास
<p><em><strong>कुरान के अपमान पर भड़का बवाल शांत होता नहीं दिख रहा है। शनिवार तड़के इराक की राजधानी बगदाद में प्रदर्शन हुआ, जहां सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने ग्रीन जोन पर हमला कर दिया।</strong></em></p>
पिछले महीने बकरीद के दिन स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में कुरान जलाए जाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि शुक्रवार (21 जुलाई) को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में मुस्लिम विरोधी समूह ने इस पवित्र ग्रंथ का अपमान किया। इसे लेकर शनिवार (22 जुलाई) तड़के इराक की राजधानी बगदाद में प्रदर्शन हुआ, जहां सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने भारी सुरक्षा वाले ग्रीन जोन पर हमला कर दिया। यहां सभी विदेशी दूतावास हैं।
शुक्रवार को ‘डांस्के पैट्रियटर’ नामक अतिराष्ट्रवादी समूह ने कोपेनहेगन स्थित इराक के दूतावास के सामने पवित्र ग्रंथ को जला दिया, जिस पर ईरान के लोग भड़के हुए हैं। मौके पर मौजूद सुरक्षाबलों ने कड़ी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। भारी मात्रा में मौजूद सुरक्षाबालों ने ग्रीन जोन की ओर जाने वाले जम्हुरिया पुल को अवरुद्ध कर दिया था, जिससे वे डेनिश दूतावास तक नहीं पहुंच सके।
दो दिन पहले ही हुआ था भारी प्रदर्शन
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही बगदाद में भारी विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला था, जब प्रदर्शनकारियों ने स्वीडिश दूतावास पर धावा बोल दिया था। दरअसल, प्रदर्शनकारी इस बात पर भड़के हुए थे कि स्वीडिश पुलिस ने एक बार और कुरान जलाने की अनुमति दे दी। दुबारा अनुमति दिए जाने से नाराज इराकी लोगों ने बगदाद स्थित स्वीडन के दूतावास परिसर में आग लगा दी। गनीमत यह रही कि बवाल बढ़ने की आशंका को देखते हुए एक दिन पहले ही दूतावास के कर्मचारियों को निकाला गया था।
स्वीडन में दूसरी बार हुआ कुरान का अपमान
इस प्रदर्शन के कुछ घंटों बाद ही इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने कुरान के अपमान के विरोध में स्वीडन के साथ राजनयिक संबंध तोड़ दिए। उन्होंने स्वीडन से अपने राजनयिक को भी वापस बुला लिया। स्टॉकहोम में पिछले महीने एक प्रदर्शन के दौरान कुरान की एक प्रति जलाने वाले शख्स ने बीते गुरुवार को फिर से वही काम करने की धमकी दी थी। आरोप है कि स्वीडन पुलिस ने उसे अनुमति दे दी, जिसके बाद उसने पवित्र कुरान का अपमान किया। उसने इराकी झंडे और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर का भी अपमान किया। इस घटना से इस्लामिक देश भड़के हुए हैं।
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