राहुल गांधी की सजा पर रोक: “घर-वापसी” पर होगा विपक्षी गठबंधन में घमासान ! 

<p><em><strong>राहुल गांधी को मोदी सरनेम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फौरी राहत दे दी है। उनकी संसद-सदस्यता भी बहाल कर दी गयी है। वह संसद भी पहुंचे। राज्यसभा में दिल्ली सेवा अध्यादेश पर भी बहस हो रही है। अब मामला विपक्षी गठबंधन और उसमें कांग्रेस की भूमिका पर केंद्रित हो गयी है।</strong></em></p>

राहुल गांधी की सजा पर रोक: “घर-वापसी” पर होगा विपक्षी गठबंधन में घमासान ! 
08-08-2023 - 08:10 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

कयास लगाए जा रहे हैं कि अब तक कांग्रेस ने जिस तरह “बड़ा दिल” दिखाया है, वह अब शायद अपना स्टेक और बढ़ाएगी। हो सकता है कि वह इंडिया नाम के गठबंधन के संयोजक और प्रधानमंत्री पद के लिए भी दावा पेश कर दे। बहरहाल, सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या राहुल गांधी को तुगलक लेन का उनका पुराना घर वापस मिलेगा, या कोई नया घर उन्हें अलॉट किया जाएगा। 
सांसदी के बाद ‘पुराना घर’ चाहिए
राहुल गांधी के संसद में वापस आने से सबसे बड़ा बदलाव तो कांग्रेस की अपनी राजनीति, उसके फ्लोर मैनेजमेंट और उसके संसदीय पराक्रम में दिखेगा। ये जो विपक्षी एकता की कवायद अभी दिख रही थी, जिस तरह से फ्लोर मैनेजमेंट राहुल गांधी की अनुपस्थिति में हो रही थी, एक साथ भाजपा सरकार पर कांग्रेस हमलावर थी, उसमें अब कमी आएगी। इसकी वजह यह है कि कांग्रेस अब राहुल को प्रोजेक्ट करेगी, विपक्ष के जो महत्वाकांक्षी हैं, वे नेपथ्य में धकेले जाएंगे। 
खत्म नहीं होगी विपक्षी एकता
विपक्षी एकता अभी खत्म नहीं होने जा रही है, लेकिन एक समायोजन के साथ जिस तरह विपक्ष हमलावर था, उसमें कमी आएगी। एक बात और है कि भाजपा और खासकर उसका अभी का नेतृत्व तो राहुल पर हमेशा हमला करता है, तो बीजेपी का नेतृत्व जरूर यह सोचेगा कि राहुल कुछ न कुछ करेंगे, उनके सलाहकार जरूर कुछ उल्टा करवाएंगे और बीजेपी को चुनावी वर्ष में मुद्दा मिल जाएगा। 
आवास का मामला अनस ुलझा
अब, राहुल गांधी के आवास का मसला जरूर है, जो उनसे छीन लिया गया था। घरों का फैसला तो संसद की आवास समिति करती है कि कौन सा घर किसको अलॉट होगा? तो, यह फैसला तो उनको ही करना है। हालांकि, कांग्रेस की कोशिश तो वही रहेगी कि राहुल को तुगलक लेन का वही घर मिले, जिसमें वह रहते थे। अब नाक का सवाल तो यह कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए है, लेकिन आवास समिति तो देखभाल कर ही घर देगी। यह निश्चित है कि राहुल अपना वही बंगला चाहेंगे, लेकिन अंतिम फैसला संसदीय आवास समिति ही करेगी। 
बीजेपी भी राहुल की वापसी से खुश 
हालांकि, बीजेपी सशंकित भी है। राहुल गांधी से उसको डर भी है, लेकिन वह उनके बहाने राजनीति भी करती है, आक्रामक भी हो जाती है, यानी बीजेपी के वह “मसाला” भी हैं। दूसरे, कांग्रेस राहुल को प्रोजेक्ट करेगी। वैसे भी, कांग्रेस का यह रिकॉर्ड है कि वह जब भी विपक्ष में रही, उसने गांधी-नेहरू परिवार को ही प्रोजेक्ट किया। नरसिंह राव इसके अपवाद रहे, हालांकि उस दौर में भी प्रोजेक्शन परिवार पर ही रहा। 
परिवार से आगे नहीं बढ़ पा रहे
जब तिवारी कांग्रेस बनी, तो वह सोनिया गांधी को स्थापित करने की ही कोशिश थी। 1998 में जब सोनिया गांधी अचानक अध्यक्षा बनीं, तो उसके पीछे की यही रणनीति थी। यह 1971 से ही कांग्रेस की नियति है। वह “परिवार” से आगे देख ही नहीं पाती है। कांग्रेस को देखिए तो अभी वह खासे उत्साह में है। मीडिया का एक धड़ा भी इसको वैसे ही प्रचारित कर रहा है। वैसे, कांग्रेस को उत्साह में होना ही चाहिए। हालांकि, नेता की सफलता इस पर निर्भर करती है कि वह कितना परिपक्व है, उसके सलाहकार कितने परिपक्व हैं? 
दिल्ली अध्यादेष पास होगा 
दिल्ली को लेकर जो अध्यादेश है, उस पर चर्चा हो ही रही है और उसका पारित होना महज औपचारिकता है, क्योंकि नंबर्स तो सत्ताधारी दल के पक्ष में ही है। राज्यसभा में तीन बड़े दलों ने (बीजद, बीआरएस, वाइएसआरकांग्रेस) निष्पक्षता छोड़कर सरकार का साथ देने की घोषणा पहले ही कर दी थी, इसलिए विपक्ष कितना भी हंगामा करे, विधेयक पारित होगा ही। सरकार ने इससे पहले भी धड़ाधड़ हंगामे के बीच विधेयक तो पारित करवाए ही हैं। 
विपक्ष में संयोजन पर होगा घमासान
इंडिया के नाम का जो विपक्षी गठबंधन बना है, उसमें राहुल गांधी के संयोजन का मसला भी उठ सकता है। एक बात हमें याद रखनी चाहिए कि नीतीश कुमार भले ही दौड़भाग कर रहे हों, लेकिन संयोजन के पीछे ममता बनर्जी का भी हाथ था। ममता यह भी मानती हैं कि वह भविष्य की पीएम कैंडिडेट हैं। अगर कांग्रेस को प्रोजेक्ट किया गया, तो इनकी उम्मीदें धूमिल पड़ती हैं। राहुल गांधी का संयोजक बनना इतना आसान नहीं है। राहुल में संयोजन का गुण भी नहीं दिखता। कुल मिलाकर लालू प्रसाद ही उनके एकमात्र समर्थक दिखते हैं, बाकी तो कोई खुलकर उनका नाम लेता नहीं है। 

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।