आरबीआई की चेतावनी कि बैंकों का निजीकरण देश के लिए अच्छा नहीं
NULL
सरकार देश में सरकारी बैंकों की संख्या कम करना चाहती है लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) का कहना है कि इससे फायदे से अधिक नुकसान हो सकता है। आरबीआई ने अपने एक लेख में आगाह करते हुए सरकार को इस मामले में ध्यान से आगे बढ़ने की सलाह दी है। उसका कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बड़े पैमाने पर निजीकरण से फायदे से अधिक नुकसान हो सकता है। आरबीआई के बुलेटिन में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि निजी क्षेत्र के बैंक (पीवीबी) लाभ को अधिकतम करने में अधिक कुशल हैं जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में बेहतर प्रदर्शन किया है। मोदी सरकार की सबसे सफल योजनाओं में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर शामिल है। इस स्कीम के तहत नागरिकों को केंद्र सरकार की ओर से कई चीजों पर अलग-अलग रूपों में सब्सिडी दी जाती है। इसकी सफलता का श्रेय सरकारी बैंकों को जाता है।
लेख में कहा गया है कि सरकार की तरफ से निजीकरण की ओर धीरे-धीरे बढऩे से यह सुनिश्चित हो सकता है कि वित्तीय समावेशन और मौद्रिक संचरण के सामाजिक उद्देश्य को पूरा करने में एक ‘शून्य’ की स्थिति नहीं बने।
What's Your Reaction?