अब दुश्मनों की ख़ैर नही,समुद्री दुश्मनों से निपटने को तैयार विध्वंसक मोरमुगाओ युद्धपोत हुआ नौसेना में शामिल
<p><em>भारतीय नौसेना को एक और स्वदेशी युद्धपोत मिल गया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में आईएनएस मोरमुगाओ को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। आईएनएस मोरमुगाओ' को सेना में शामिल किए जाने के लिए मुंबई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी उपस्थित रहे। </em></p>
पश्चिमी तट पर स्थित ऐतिहासिक गोवा बंदरगाह शहर के नाम पर मोरमुगाओ नाम रखा गया है। संयोग से यह पोत पहली बार 19 दिसंबर, 2021 को समुद्र में उतरा था, जिस दिन पुर्तगाली शासन से गोवा की मुक्ति के 60 वर्ष पूरे हुए थे।
सतह हो या हवा, डिस्ट्रॉयर नौसेना पोत कही से भी कर सकता है मार
आईएनएस मोरमुगाओ भारत के सबसे आधुनिक युद्धपोत में से एक है, जिसके तकरीबन 75 फीसदी उपकरण और हथियार भारत में बने हैं। भारतीय नौसेना के अनुसार यह युद्धपोत दूरसंवेदी उपकरणों, आधुनिक राडार और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल जैसी हथियार प्रणालियों से लैस है। नौसेना ने बताया कि इस युद्धपोत की लंबाई 163 मीटर, चौड़ाई 17 मीटर और वजन 7,400 टन है। इसे भारत के निर्मित सबसे घातक युद्धपोतों में गिना जा सकता है।
75% स्वदेशी है आईएनएस मोरमुगाओ
नौसेना ने कहा इस जहाज की विशेषता यह है कि इसमें लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह स्वदेशी है। इसे आत्मनिर्भर भारत के तहत बनाया गया है। आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण के उद्देश्य से 44 युद्धपोत और पनडुब्बियों में से 42 का निर्माण भारतीय शिपयार्ड में किया जा रहा है और इस तरह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के हमारे प्रयासों को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा, 55 युद्धपोत और पनडुब्बियों के निर्माण के लिए आदेश जारी किए जा चुके हैं। इनका निर्माण भारतीय शिपयार्ड में ही किया जाएगा।
ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों से होगा लैस
आईएनएस मोरमुगाओ पर ब्रह्मोस, बराक-8 जैसी आठ मिसाइलें लगाई जाएंगी। मोरमुगाओ पर लगे राडार सिस्टम से दुश्मन को ट्रैक किया जा सकता है। ये सिस्टम हवा में 70 किलोमीटर तक दुश्मन पर निशाना लगा सकता है। इसके अलावा समुद्र में 300 किलोमीटर तक दुश्मन को मारने में सक्षम है।
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