एससीओ की बैठक: बीआरआई के खिलाफ रूस-चीन-पाक के आगे अकेले खड़ा रहा भारत

<p><em><strong>मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन की शिखर सम्मेलन के बाद संयुक्त घोषणा पत्र जारी हुआ। सम्मेलन में भारत की सक्रियता से आतंकवाद व कट्टरपन पर अलग से घोषणा पत्र जारी हुआ। चीन की बीआरआई परियोजना का कजाख्स्तान किर्गिजस्तान पाकिस्तान रूस ताजिकिस्तान व उज्बेकिस्तान ने समर्थन किया है और साथ मिलकर इसे लागू करने की बात कही है।</strong></em></p>

एससीओ की बैठक: बीआरआई के खिलाफ रूस-चीन-पाक के आगे अकेले खड़ा रहा भारत
06-07-2023 - 08:30 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में भारत में एक बार फिर जता दिया है कि जब मुद्दों व अपनी राष्ट्रीय हित की बात आती है तो वह किसी भी बाहरी देश के दबाव में नहीं आता। मंगलवार को पीएम नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में एससीओ के शीर्ष नेताओं की बैठक में भारत ने चीन की तरफ से दूसरे देशों को सड़क, रेल, समुद्र मार्ग से जोड़ने के लिए शुरू की गई बेल्ट एंड रोड इनिसिटिव (बीआरआई) का समर्थन करने से साफ मना कर दिया।
भारत ने बीआरआई से खुद को रखा अलग
शीर्ष नेताओं की बैठक के बाद देर शाम को जब एससीओ ने संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया तो उसमें बताया गया कि चीन की बीआरआई कार्यक्रम का रूस, पाकिस्तान, काजिकस्तान, किर्गिजस्तान, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान ने समर्थन किया है। यानी आठ सदस्यीय इस संगठन में सिर्फ भारत ही ऐसा देश रहा, जिसने बीआरआई से अपने आपको अलग कर दिया है। भारत की अध्यक्षता में पहली एससीओ की बैठक हुई है।
आर्थिक एजेंडा को भी नहीं दिया समर्थन
सूत्रों के मुताबिक एससीओ की तरफ से सदस्य देशों के लिए वर्ष 2030 तक का आर्थिक एजेंडा बनाने के प्रस्ताव को भी भारत का समर्थन नहीं मिला है। संयुक्त घोषणा पत्र के मुताबिक शीर्ष नेताओं ने माना है कि एससीओ के जिन सदस्यों ने आर्थिक विकास रणनीति 2030 को स्वीकार किया है उनके लिए इसे लागू करना जरूरी है। इससे साफ है कि एससीओ के सभी सदस्य देश उक्त आर्थिक विकास रणनीति का समर्थन नहीं किया है। इस बारे में कोई अलग से बयान नहीं दिया गया है, इसलिए पता नहीं कि किन देशों ने इसका समर्थन नहीं किया है लेकिन जानकारों का कहना है कि बीआरआई की तरह इस रणनीति का समर्थन नहीं करने वाला एकमात्र देश भारत ही है।
पीएम मोदी ने वर्चुअल तरीके से दिया भाषण
भारत को मुख्य तौर पर बीआरआई की तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर बनाये जा रहे चीन-पाकिस्तान आर्थिक काॅरिडोर को लेकर आपत्ति है। कश्मीर का यह हिस्सा भारत का अभिभाज्य अंग है जिस पर पाकिस्तान ने अवैधानिक तरीके कब्जा कर रखा है। वर्चुअल तरीके से हुई एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने भी अपने भाषण में कहा था कि, ‘कनेक्टिविटी प्रगति के लिए जरूरी है लेकिन एससीओ के सदस्य देशों की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना भी बहुत जरूरी है।’

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।