प्लास्टिक वेस्ट से बनाते हैं ट्री गार्ड..! कचरा साफ और पेड़ भी सेफ
पर्यावरण के लिए प्लास्टिक का कचरा खतरनाक है और पेड़-पौधे वरदान। कानपुर के एक ग्रुप ने इन दोनों को मिलाकर एक नया अभियान शुरू किया है। प्लास्टिक के कचरे को रीसाइकिल करके उससे ट्री गार्ड बनवाने का। इस ग्रुप के सदस्य जॉगिंग करते समय प्लास्टिक का कचरा उठाते हैं तो उनकी सेहत भी बेहतर बनी रहती है। उनकी इसी खासियत की वजह से उन्हें कानपुर प्लॉगर्स कहा जाता है। यह पश्चिम में शुरू हुई एक नई सोच है जो 'पिकअप' और 'जॉगिंग' से मिलकर बनाया गया शब्द प्लॉगिंग कहलाती है।
कानपुर प्लॉगर्स की शुरुआत की लखनपुर निवासी डॉ संजीवनी शर्मा ने। उनका मकसद मां गंगा के किनारे बढ़ रहे कचरे को साफ करना था। आज इनके साथ करीब 250 से ज्यादा उत्साही सदस्य हैं। कानपुर प्लॉगर्स टीम के सदस्य हर रोज गंगा के किनारे घाटों, दुकानों, घरों से प्लास्टिक जमा करके उन्हें अपने खर्च पर रीसाइकिल कराते हैं। रीसाइकिल होने के बाद जो ट्री गार्ड बनते हैं वे काफी मजबूत होते हैं। टीम का दावा है कि ये वर्षों तक चलेंगे।
चार हजार प्लास्टिक थैलियों से बनता है एक ट्री गार्ड
एक ट्री गार्ड को बनाने में करीब चार हजार प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल होता है। इन्हें बनने में करीब 6 दिन का समय लगता है और लगभग दो हजार रुपये का खर्च आता है। यह पूरा खर्च कानपुर प्लॉगर्स ही उठाते हैं। इस तरह बने ट्री गार्ड की एक और खासियत यह है कि पेड़ों को इनकी जरूरत न रहे तो इन्हें हटाकर दूसरे छोटे पौधों के आसपास लगाया जा सकता है। ये पट्टियों में बने होते हैं इसलिए आसानी से हटाकर दूसरी जगह ले जाए जा सकते हैं।
What's Your Reaction?