महारानी की मौत के बाद क्या भारत आएगा कोहिनूर..! आखिर कितना दमदार है हमारा दावा
ब्रिटेन की महारानी ऐलिजाबेथ के निधन के बाद शुक्रवार को सोशल मीडिया पर कोहिनूर हीरे को वापस भारत लाने की मांग तेज हो गई। लेकिन, बड़ा सवाल यही है कि कोहिनूर हीरे को लेकर क्या रहा है भारत का रुख?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कुछ साल पहले एक आरटीआई के जवाब में कहा था कि करीब 170 साल पहले लाहौर के महाराजा ने इंग्लैंड की महारानी के सामने झुकते हुए कोहिनूर हीरा उनके सुपुर्द कर दिया था और इसे अंग्रेजों को सौंपा नहीं गया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार का रुख था कि करीब 20 करोड़ डॉलर की कीमत वाला यह हीरा ना तो चुराया गया और ना ही अंग्रेज शासक इसे जबरन ले गये बल्कि पंजाब के पूर्ववर्ती शासकों ने इसे ईस्ट इंडिया कंपनी को दिया था।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ‘ऐन एरा ऑफ डार्कनेस’ किताब में लिखा है कि कोहिनूर को एक समय दुनिया का सबसे बड़ा हीरा होने का दावा किया गया था जिसका वजन 158.6 ग्राम था। माना जाता है कि सबसे पहले यह हीरा 13वीं सदी में आंध्र प्रदेश के गुंटूर के पास मिला था। कुछ जानकारों का कहना है कि नादिर शाह ने हीरे को कोहिनूर नाम दिया था। भारत सरकार कई बार कोहिनूर को वापस करने की मांग करती रही है। सबसे पहले इस संबंध में मांग 1947 में की गयी थी। हालांकि ब्रिटिश सरकार भारत के कोहिनूर के दावों को खारिज करती रही है।
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