दिग्गज नेता ‘गुलाम’ भी अब ‘आजाद’, अब कांग्रेस कैसे करेगी मोदी सरकार का मुकाबला
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गांधी परिवार से अलग व्यक्ति के रूप में कांग्रेस अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष ढूंढने मे लगी है। संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं कि जल्दी ही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस के अध्यक्ष हो सकते हैं लेकिन इससे पहले ही पार्टी मुश्किल में दिख रही है। पार्टी के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद ने पांच पन्नों का इस्तीफा लिख कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है।
देश की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि साथ छोड़ते महारथी, बिखरती पार्टी और दरकते जनाधार के साथ आखिर मोदी सरकार का मुकाबला कांग्रेस कैसे कर पाएगी। लगातार चुनावी हार और दरकते जनाधार के बीच कांग्रेस अब तक सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे में कांग्रेस के लिए मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जब कांग्रेस संगठनात्मक चुनाव की दिशा में आगे बढ़ रही है। पार्टी के अध्यक्ष का चुनाव होने वाला है। इस बीच आखिर क्या हो गया कि संसद के भीतर से लेकर बाहर तक पार्टी की पहचान रहे पार्टी के दिग्गज नेता ‘गुलाम’ कांग्रेस का साथ छोड़ ‘आजाद’ होऩे को मजबूर हो गया।
गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद से एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर क्या है कि देश में करीब 7 दशक तक सत्ता में रही पार्टी से उसके दिग्गज नेताओं का मोह भंग हो रहा है। एक तरफ पार्टी जहां भारत जोड़ो यात्रा की तैयारी कर रही हैं, वहीं पार्टी खुद टूट रही है। आखिर में क्या पार्टी को 'भारत जोड़ो यात्रा' से पहले 'कांग्रेस जोड़ो यात्रा' की जरूरत है। गुलाम नबी आजाद ने अपने इस्तीफे में इसका भी जिक्र किया है। कई तथ्य इस बात की पुष्टि भी करते हैं।
एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के अनुसार 2014 और 2021 के बीच हुए चुनावों के दौरान 222 चुनावी उम्मीदवारों ने कांग्रेस पार्टी छोड़ी। वहीं, इस दौरान 177 सांसद और विधायक पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। स्थिति यह है कि पिछले 8 महीने के दौरान ही कपिल सिब्बल, आरपीएन सिंह, अश्विनी कुमार, सुनील जाखड़, हार्दिक पटेल, कुलदीप बिश्नोई जैसे बड़े नेता पार्टी का दामन छोड़ चुके हैं। पूर्वोत्तर में असम से लेकर पश्चिम में गुजरात तक, उत्तर में जम्मू-कश्मीर से लेकर दक्षिण में केरल, तमिलनाडु तक पार्टी के दिग्गज नेता साथ छोड़ चुके हैं।
पार्टी कैसे करेगी मुकाबला?
साल 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। मौजूदा स्थिति को देखें तो विपक्ष पूरी तरह से बिखरा हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2024 में अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता से दूर रखना है तो विपक्ष को एकजुट होना होगा। कई विश्लेषक मानते हैं क्षेत्रीय दलों की स्थिति और महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए कांग्रेस को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। वर्ष 2014 से पहले कांग्रेस ने जिस तरह से संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार चलाई थी, उसके लिए उसे फिर से अगुवा बनना होगा। इसके उलट जहां कांग्रेस दूसरों को एकजुट करती, उससे अपना ही घर नहीं संभल रहा है। ऐसे में सवाल है कि कांग्रेस पीएम मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार को किस बूते मात दे पाएगी।
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