इसरो का GSAT-N2 सैटेलाइट: स्पेसएक्स के फाल्कन 9 से लॉन्च की तैयारी
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) जल्द ही अपना नया कम्युनिकेशन सैटेलाइट GSAT-N2 लॉन्च करने के लिए तैयार है। इस उपग्रह को एलन मस्क की कंपनी SpaceX के फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए अमेरिका से लॉन्च किया जाएगा। इस अत्याधुनिक सैटेलाइट को GSAT-20 के नाम से भी जाना जाता है।
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) जल्द ही अपना नया कम्युनिकेशन सैटेलाइट GSAT-N2 लॉन्च करने के लिए तैयार है। इस उपग्रह को एलन मस्क की कंपनी SpaceX के फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए अमेरिका से लॉन्च किया जाएगा। इस अत्याधुनिक सैटेलाइट को GSAT-20 के नाम से भी जाना जाता है। इसका उद्देश्य भारत में उड़ानों के दौरान इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराना और देश के दूरदराज इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाना है।
भारत में उड़ान के दौरान इंटरनेट सेवा का नया अध्याय
भारत में अब तक फ्लाइट्स के दौरान इंटरनेट सेवा की अनुमति नहीं थी। लेकिन हाल ही में सरकार ने नियमों में संशोधन किया है, जिससे एयरलाइंस को 3,000 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद वाई-फाई आधारित इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने की अनुमति मिल गई है। नई व्यवस्था के तहत, यात्री इंटरनेट सेवाओं का उपयोग तभी कर सकते हैं जब विमान में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग की अनुमति दी गई हो। यह सैटेलाइट इन सेवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाएगा।
GSAT-N2 क्यों है महत्वपूर्ण?
GSAT-N2 (GSAT-20) एक Ka-बैंड हाई-थ्रूपुट कम्युनिकेशन सैटेलाइट है, जो ब्रॉडबैंड सेवाओं और इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी में क्रांति लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी विशेषताएं:
- वजन: 4,700 किलोग्राम
- मिशन अवधि: 14 साल
- डेटा थ्रूपुट: 48 Gbps
- 32 यूजर बीम्स, जिनमें से 8 बीम पूर्वोत्तर क्षेत्र और 24 बीम शेष भारत को कवर करती हैं।
- Ka x Ka ट्रांसपोंडर्स और मल्टी-बीम आर्किटेक्चर, जो फ्रीक्वेंसी रीयूज और मजबूत कनेक्टिविटी सुनिश्चित करता है।
स्पेसएक्स का उपयोग क्यों?
भारत का अपना लॉन्च व्हीकल, मार्क-3, अधिकतम 4,000 किलोग्राम वजन तक के सैटेलाइट को जियोस्टेशनरी ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में ले जा सकता है। चूंकि GSAT-N2 का वजन 4,700 किलोग्राम है, इसरो को स्पेसएक्स के फाल्कन 9 का सहारा लेना पड़ा। यह पहला मौका है जब इसरो और स्पेसएक्स के बीच वाणिज्यिक सहयोग हुआ है।
SpaceX के साथ समझौता
इसरो ने पहले भारी उपग्रहों के लिए Arianespace का उपयोग किया था, लेकिन फिलहाल उसके पास कोई सक्रिय रॉकेट नहीं है। चीन और रूस के रॉकेट भारत के लिए व्यवहारिक विकल्प नहीं हैं। इसरो की व्यावसायिक शाखा, न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के चेयरमैन राधाकृष्णन दुरईराज के अनुसार, “SpaceX के साथ हमें इस लॉन्च के लिए एक शानदार डील मिली। टेक्निकल और कमर्शियल दोनों स्तरों पर यह सौदा लाभप्रद है।”
GSAT-N2 की विशेषताएं
यह सैटेलाइट छोटे यूजर टर्मिनल्स का उपयोग करके बड़ी संख्या में ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करने में सक्षम है। इसके नैरो स्पॉट बीम्स विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों के लिए समर्पित हैं। इसके अलावा, इसकी एडवांस्ड तकनीक से सिस्टम थ्रूपुट में सुधार होगा और भारत में इंटरनेट सेवाएं मजबूत होंगी।
न केवल फ्लाइट्स बल्कि ग्रामीण इलाकों को भी लाभ
GSAT-N2 न केवल उड़ानों के दौरान इंटरनेट सेवाओं को बढ़ावा देगा बल्कि भारत के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी की जरूरतें भी पूरी करेगा। यह उपग्रह देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा साबित होगा।
निष्कर्ष:
इसरो का यह कदम भारत में डिजिटल सेवाओं को नई ऊंचाई तक पहुंचाएगा। GSAT-N2 से न केवल यात्रियों को उड़ानों के दौरान इंटरनेट सेवाएं मिलेंगी, बल्कि देश के उन क्षेत्रों को भी लाभ होगा, जहां अब तक इंटरनेट सेवाएं सीमित थीं। SpaceX के साथ इसरो की साझेदारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की तकनीकी और व्यावसायिक ताकत को भी उजागर करती है।
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