पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में चार व्यक्तियों को मौत की सजा..!
पाकिस्तान की एक अदालत ने कुरान और इस्लामिक हस्तियों के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने के आरोप में रावलपिंडी में चार व्यक्तियों को मौत की सजा सुनाई है।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की एक अदालत ने कुरान और इस्लामिक हस्तियों के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने के आरोप में रावलपिंडी में चार व्यक्तियों को मौत की सजा सुनाई है।
जज तारिक अयूब ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मुसलमानों के लिए पवित्र माने जाने वाले व्यक्तित्वों और कुरान का अपमान करना ऐसा अपराध है जिसे माफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने इन चार व्यक्तियों को मौत की सजा देने के साथ-साथ उन पर 46 लाख पाकिस्तानी रुपये (लगभग 16,000 अमेरिकी डॉलर) का जुर्माना भी लगाया।
दोषी व्यक्तियों के नाम और सजा का विवरण
दोषियों की पहचान राणा उस्मान, अशफाक अली, सलमान सज्जाद, और वाजिद अली के रूप में हुई है।
अदालती आदेश (24 जनवरी, 2025) के अनुसार:
- इन चारों को पवित्र पैगंबर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए फांसी की सजा सुनाई गई।
- पवित्र कुरान का अपमान करने के लिए उम्रकैद की सजा।
- धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए 10 साल की कैद।
सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
अभियोजन और बचाव पक्ष की प्रतिक्रिया
अभियोजन पक्ष के वकील ने बताया कि यह मामला फोरेंसिक सबूतों पर आधारित था, जिन्हें दोषियों के डिवाइस से प्राप्त किया गया।
दूसरी ओर, दोषियों के वकील मंजूर रहमानी ने अदालत के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जो संदेह और अनिश्चितताएं होती हैं, उन्हें अदालतें नजरअंदाज कर देती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि न्यायाधीश अक्सर धार्मिक आक्रोश और भीड़ हिंसा के डर से ऐसे मामलों में निर्दोष को भी दोषी करार देते हैं।
“हम इस फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी कर रहे हैं और उच्च न्यायालय में जाएंगे,” रहमानी ने कहा।
परिवारों की अपील और आलोचना
आरोपियों के परिवारों द्वारा बनाए गए एक सहायता समूह ने इस मामले में गिरफ़्तारी और सजा की प्रक्रिया को पिछले मामलों जैसा बताया।
सहायता समूह के एक सदस्य ने कहा, “हम सरकार से आग्रह करते हैं कि इन मामलों में वृद्धि की जांच के लिए एक आयोग का गठन करें, ताकि इन युवाओं की जिंदगी सलाखों के पीछे बर्बाद न हो।”
ईशनिंदा कानून की आलोचना
आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून का अक्सर दुरुपयोग होता है।
- ये कानून 1980 के दशक में तत्कालीन तानाशाह जनरल जिया-उल-हक द्वारा पेश किए गए थे।
- सैकड़ों लोगों पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया है, जिनमें से कई को मौत की सजा सुनाई गई है।
- अब तक लगभग 100 लोगों की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई है।
- दर्जनों आरोपी अभी भी मौत की सजा और एकांत कारावास में हैं।
आलोचकों के अनुसार, ये कानून न केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल होते हैं, बल्कि व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए भी इनका दुरुपयोग किया जाता है।
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