सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा: चीन की विशाल परमाणु संलयन सुविधा, भारत के लिए खतरे की घंटी?

चीन के मियानयांग शहर में एक विशाल न्यूक्लियर फ्यूजन (परमाणु संलयन) अनुसंधान केंद्र बनाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केंद्र केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि चीन की परमाणु क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से भी विकसित किया जा रहा है। सैटेलाइट इमेज से पता चला है कि यह एक विशाल परिसर है, जिसमें चार बाहरी हिस्से हैं, जिनमें लेजर बे लगे हुए हैं।

सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा: चीन की विशाल परमाणु संलयन सुविधा, भारत के लिए खतरे की घंटी?
31-01-2025 - 09:52 AM

नयी दिल्ली। चीन के मियानयांग शहर में एक विशाल न्यूक्लियर फ्यूजन (परमाणु संलयन) अनुसंधान केंद्र बनाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केंद्र केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि चीन की परमाणु क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से भी विकसित किया जा रहा है। सैटेलाइट इमेज से पता चला है कि यह एक विशाल परिसर है, जिसमें चार बाहरी हिस्से हैं, जिनमें लेजर बे लगे हुए हैं। इस केंद्र के मध्य कक्ष में ड्यूटेरियम और ट्रिटियम जैसे हाइड्रोजन समस्थानिकों को तीव्र लेजर किरणों से जोड़कर परमाणु संलयन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

द्वैध उद्देश्य: परमाणु हथियार या ऊर्जा स्रोत?

इस सुविधा का सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसे परमाणु हथियारों के विकास के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। न्यूक्लियर पॉलिसी विशेषज्ञ विलियम अल्बर्के के अनुसार,
"
किसी भी देश के पास यदि NIF (नेशनल इग्निशन फैसिलिटी)- जैसी सुविधा है, तो वह अपने मौजूदा हथियारों की डिज़ाइन को और बेहतर बना सकता है, वह भी बिना किसी परीक्षण के।"

यह क्षमता चीन को अंतरराष्ट्रीय परीक्षण प्रतिबंध संधियों का उल्लंघन किए बिना अपने परमाणु हथियारों को उन्नत करने की अनुमति दे सकती है।

हालांकि, इस सुविधा का दूसरा पहलू यह है कि इससे परमाणु संलयन ऊर्जा पर शोध को बढ़ावा मिल सकता है। फ्यूजन ऊर्जा को भविष्य का "पवित्र ग्रेल" माना जाता है, क्योंकि यह लगभग असीमित ऊर्जा स्रोत प्रदान कर सकता है और पर्यावरण पर इसका न्यूनतम प्रभाव होगा। यदि यह शोध सफल होता है, तो चीन वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी बन सकता है, जिससे ऊर्जा संतुलन बदल सकता है।

चीन की परमाणु वृद्धि: क्या भारत को चिंता करनी चाहिए?

पिछले कुछ वर्षों में चीन की परमाणु क्षमताओं में तेजी से वृद्धि हुई है। जनवरी 2023 में चीन के पास 410 परमाणु हथियार थे, जो जनवरी 2024 तक बढ़कर 500 हो गए। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार, चीन इस दशक के अंत तक अमेरिका और रूस की परमाणु मिसाइल क्षमता की बराबरी कर सकता है।

इसके विपरीत, भारत चीन से काफी पीछे है। भारत के पास 172 परमाणु हथियार होने का अनुमान है, जो चीन की तुलना में काफी कम है। इसके अलावा, परमाणु ऊर्जा उत्पादन के मामले में भी भारत पिछड़ा हुआ है।

विषय

भारत

चीन

परमाणु हथियारों की संख्या (2024)

172

500

परमाणु रिएक्टरों की संख्या

23

55

परमाणु ऊर्जा उत्पादन का योगदान

6%

अधिक और तेजी से बढ़ता हुआ

नई परमाणु परियोजनाएं

सीमित

6-8 रिएक्टर प्रति वर्ष

चीन तीसरी पीढ़ी (थर्ड-जेनरेशन) के परमाणु रिएक्टरों का भी विकास कर रहा है और हर साल 6-8 नए रिएक्टर जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

मियानयांग में बन रही नई परमाणु संलयन सुविधा चीन को न केवल परमाणु हथियारों के क्षेत्र में बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के मामले में भी भारत से काफी आगे ले जा सकती है। यह अंतर भविष्य में भारत की रणनीतिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।