डोंट कंट्रोल मी: ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान जया बच्चन का तीखा बयान
उन्होंने कहा, "यह कहने में अजीब लग रहा है क्योंकि जो हुआ, वह मुझे किसी कहानी या फिल्म जैसा लग रहा है। ऐसी चीजें आप किताबों में पढ़ते हैं, पर्दे पर देखते हैं कि कोई इस तरह आए, इतने लोगों को मार दे... यह सब अवास्तविक लगता
नयी दिल्ली। समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने बुधवार को राज्यसभा में पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले को लेकर चिंता जताई और अनुच्छेद 370 हटाने के बाद सरकार द्वारा किए गए वादों पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा, "यह कहने में अजीब लग रहा है क्योंकि जो हुआ, वह मुझे किसी कहानी या फिल्म जैसा लग रहा है। ऐसी चीजें आप किताबों में पढ़ते हैं, पर्दे पर देखते हैं कि कोई इस तरह आए, इतने लोगों को मार दे... यह सब अवास्तविक लगता है।" यह टिप्पणी उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' पर बहस के दौरान की।
सत्ता पक्ष की ओर से कुछ सदस्य टिप्पणी कर रहे थे (जो प्रसारण में सुनाई नहीं दी), जिस पर बच्चन ने प्रतिक्रिया दी, "मैं ध्यान नहीं दूंगी लेकिन मेरे कान तेज़ हैं, मैं क्या करूं? ये मेरी मजबूरी है।"
उन्होंने सत्ता पक्ष की ओर इशारा करते हुए व्यंग्य में कहा, "कम से कम मैं आपको बधाई दूंगी, कि आपके पास ऐसे लेखक हैं जो 'सिंदूर' जैसे भव्य नाम सोच लेते हैं।"
उनके बगल में बैठीं शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी इस पर मुस्कराती हुई नजर आईं।
जया बच्चन ने आगे कहा, "इस ऑपरेशन का नाम 'सिंदूर' क्यों रखा गया? महिलाओं का सिंदूर तो मिटा दिया गया है।"
जब सत्ता पक्ष के सदस्य फिर से टोकने लगे, तो उन्होंने तीखे लहजे में कहा, "या तो आप बोलिए या मैं बोलूं।"
सभापति की कुर्सी पर बैठे भाजपा सांसद सुरेन्द्र सिंह नागर ने कहा, "जया जी, कृपया अध्यक्ष को संबोधित कीजिए। आपकी कही हर बात रिकॉर्ड में जाएगी।"
इस पर बच्चन ने एक बार फिर सत्ता पक्ष की ओर देखकर कहा, "जब आप बोलते हैं, मैं बीच में नहीं बोलती। जब कोई महिला बोलती है, तो मैं कभी नहीं टोकती.. इसलिए अपनी भाषा पर ध्यान दीजिए।"
इसके बाद उन्होंने पास बैठीं प्रियंका चतुर्वेदी की ओर मुड़ते हुए, जो अपनी दाहिनी भुजा से इशारा कर रही थीं, कहा, "प्रियंका, डोंट कंट्रोल मी.." इस पर सदन में हंसी छा गई, जिसमें चतुर्वेदी भी शामिल थीं।
बच्चन ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद मैंने लोगों को गर्व से कहते सुना, ‘अब आतंकवाद खत्म हो जाएगा। हम वादा करते हैं।’ तो फिर क्या हुआ?
वे पर्यटक उसी भरोसे के साथ गए थे.. ‘हम कश्मीर जा रहे हैं, यह स्वर्ग है।’
उन्हें क्या मिला? आपने उन लोगों के विश्वास और भरोसे को तोड़ दिया, जिनसे आपने वादे किए थे।"
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