‘तेरा बाप का भी मैं…चुप बैठ..’: राज्यसभा में बीजेपी सांसद पर बरसे खरगे..!
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे राज्यसभा में अपना आपा खो बैठे। जब बीजेपी सांसद नीरज शेखर, जो पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे हैं, ने उनके भाषण में दखल दिया, तो उन्हें खरगे के तीखे शब्दों का सामना करना पड़ा।
नयी दिल्ली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे राज्यसभा में अपना आपा खो बैठे। जब बीजेपी सांसद नीरज शेखर, जो पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे हैं, ने उनके भाषण में दखल दिया, तो उन्हें खरगे के तीखे शब्दों का सामना करना पड़ा।
भारतीय रुपये के अवमूल्यन पर बोलते हुए खरगे को नीरज शेखर ने बीच में टोका। इस पर खरगे ने चंद्रशेखर से अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए गुस्से में जवाब दिया, "तेरा बाप का भी मैं ऐसा साथी था। तू क्या बात करता है? तुझको लेकर घूमा। चुप, चुप, चुप बैठ।"
खरगे की इस टिप्पणी से सदन में हंगामा मच गया, जिसके बाद राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को हस्तक्षेप कर सदन की कार्यवाही को शांत कराना पड़ा। उन्होंने सदस्यों को चंद्रशेखर की महान राजनीतिक विरासत की याद दिलाई और खरगे से अपनी टिप्पणी वापस लेने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भारतीय राजनीति के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक थे और उनके प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
खरगे ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि वह चंद्रशेखर को अत्यंत सम्मान देते हैं और उनके साथ जेल भी जा चुके हैं, जिस कारण उनकी प्रतिक्रिया आई।
नीरज शेखर, जो पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद थे, 2019 में भाजपा में शामिल हुए। उनके पिता चंद्रशेखर 1990 से 1991 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे और उन्हें देश के प्रमुख समाजवादी नेताओं में गिना जाता है।
खरगे और नीरज शेखर पूर्व में एक-दूसरे के प्रति सौहार्दपूर्ण व्यवहार रखते आए हैं। खरगे ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी कोई अपमान नहीं थी, बल्कि चंद्रशेखर से उनके पुराने संबंधों का जिक्र था।
सभापति ने खरगे द्वारा इस्तेमाल किए गए “आपके बाप” जैसे शब्दों पर भी आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे शब्द सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं। खरगे ने जवाब दिया कि उनकी नियत किसी का अपमान करने की नहीं थी, लेकिन उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी खुद राजनीतिक हस्तियों का अपमान करती आई है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर की गई "मौनी बाबा" जैसी टिप्पणियों को याद किया और कहा, "वे अपमान करते हैं, हम सहन करते हैं।"
यह घटना संसद में गहराते राजनीतिक तनाव को दर्शाती है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक आम हो गई है। हालांकि खरगे की टिप्पणी उनके व्यक्तिगत अनुभवों से प्रेरित थी, लेकिन यह संसदीय मर्यादा और गरिमा बनाए रखने की जरूरत पर भी प्रकाश डालती है।
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