"प्रतिबंध हटाओ, भारत में काम करना चाहते हैं" - बांग्लादेश सरकार पर आतंकवादी संगठनों का दबाव
बांग्लादेश में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि उन पर लगाया गया प्रतिबंध हटा लिया जाए। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, ये संगठन वैश्विक इस्लामिक स्टेट और खिलाफत स्थापित करने के इरादे से सक्रिय हैं और भारत में भी अपने नेटवर्क को फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
ढाका। बांग्लादेश में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि उन पर लगाया गया प्रतिबंध हटा लिया जाए। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, ये संगठन वैश्विक इस्लामिक स्टेट और खिलाफत स्थापित करने के इरादे से सक्रिय हैं और भारत में भी अपने नेटवर्क को फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
आतंकवादी संगठनों की गतिविधियाँ बढ़ीं
सूत्रों के अनुसार, इन संगठनों की सक्रियता शैक्षणिक संस्थानों, खासकर विश्वविद्यालयों में बढ़ गई है। वे छात्रों को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,
"वे प्रतिबंध हटवाना चाहते हैं और भारत में भी यही मॉडल लागू करना चाहते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य छात्रों को कट्टरपंथी बनाना है।"
बांग्लादेश में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन
वर्तमान में बांग्लादेश में प्रतिबंधित 12 आतंकवादी संगठन निम्नलिखित हैं:
- हरकतुल जिहाद अल इस्लामी (HuJI)
- जाग्रत मुस्लिम जनता बांग्लादेश (JMJB)
- जमातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB)
- पूर्वो बांग्ला कम्युनिस्ट पार्टी (PBCB)
- इस्लामी छात्र शिबिर (ICS)
- आईएसआईएस (ISIS)
- अंसरुल्लाह बांग्ला टीम (ABT)
- अंसार अल इस्लाम
- लश्कर-ए-तैयबा (LeT)
- हिजबुत तहरीर (HT)
- अल्लाहर ढाल
- हिजबुत तौहीद
हालांकि, अंतरिम सरकार ने इस्लामी छात्र शिबिर (ICS) पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है, जिससे बाकी संगठनों के भी वैधता की मांग करने की आशंका बढ़ गई है।
आतंकवादी संगठनों की प्रमुख गतिविधियाँ
- 100 से अधिक दरगाहों का ध्वस्त करना
- धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों पर हमले
- खिलाफत के समर्थन में खुले जुलूस निकालना
- "गजवा-ए-हिंद" की स्थापना का अभियान
- नैतिक पुलिसिंग (मॉरल पुलिसिंग)
- 200 से अधिक दोषी आतंकवादियों की रिहाई
- बांग्लादेश की आतंकवाद-रोधी क्षमताओं को कमजोर करना
सरकार का रुख और भविष्य की चिंता
ढाका सरकार का कहना है कि इन संगठनों पर लगा प्रतिबंध हटाने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन हाल ही में अंसरुल्लाह बांग्ला टीम के आतंकवादी जशिमुद्दीन रहमानी की रिहाई ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार आतंकवादियों के खिलाफ सख्त रुख नहीं अपनाती, तो भारत और बांग्लादेश दोनों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।
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