‘गंगा के किनारे सीमा खींच दो’: चीनी विश्लेषक ने भारत की मैकमोहन लाइन को बताया अवैध
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर वर्षों के सैन्य तनाव के बाद संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के बीच चीनी टिप्पणीकार और नीति विश्लेषक Victor Zhikai Gao के ताजा बयान ने नई विवाद की स्थिति पैदा कर दी..
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर वर्षों के सैन्य तनाव के बाद संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के बीच चीनी टिप्पणीकार और नीति विश्लेषक Victor Zhikai Gao के ताजा बयान ने नई विवाद की स्थिति पैदा कर दी है।
तिब्बत, भारत-चीन सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों पर दिए एक हालिया इंटरव्यू में गाओ ने मैकमोहन लाइन की वैधता पर सवाल उठाते हुए तीखा हमला बोला। मैकमोहन लाइन वही औपनिवेशिक काल की सीमा है, जिसे भारत अपनी पूर्वी सीमा का आधार मानता है।
गंगा के किनारे “विक्टर गाओ लाइन” खींचने की बात
गाओ ने एक विवादास्पद तुलना करते हुए कहा कि यदि भारत मैकमोहन लाइन को मान्यता देने पर जोर देता है, तो चीन भी मनमाने तरीके से गंगा नदी के किनारे एक “विक्टर गाओ लाइन” खींच सकता है और उसके उत्तर के क्षेत्रों पर दावा कर सकता है।
उन्होंने कहा,“हम गंगा नदी के किनारे विक्टर गाओ लाइन को भारत और चीन की सीमा क्यों नहीं मान सकते?”
गाओ का तर्क था कि मैकमोहन लाइन “अवैध” है क्योंकि इसे ब्रिटिश औपनिवेशिक अधिकारियों ने चीन की भागीदारी के बिना तैयार किया था।
इससे पहले भी गाओ दावा कर चुके हैं कि गंगा नदी के उत्तर का पूरा क्षेत्र चीन का हिस्सा है। उनके इन बयानों को चीनी सोशल मीडिया पर काफी समर्थन मिला है। समर्थकों ने उन्हें “डिप्लोमैटिक फाइटर” बताते हुए “विक्टर गाओ लाइन” को आक्रामक भू-राजनीतिक संदेश का उदाहरण बताया।
अरुणाचल प्रदेश पर भी दावा
गाओ ने चीन के आधिकारिक बयानों से आगे बढ़ते हुए यह भी कहा कि भारत को उस क्षेत्र को “समर्पित” कर देना चाहिए, जिसे बीजिंग “दक्षिण शिजांग” कहता है। यह संदर्भ भारतीय राज्य Arunachal Pradesh से है।
चीन लगभग 90,000 वर्ग किलोमीटर में फैले अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर दावा करता है, जबकि यह भारत का अभिन्न और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त राज्य है। बीजिंग लगातार भारतीय नेताओं के वहां दौरे का विरोध करता रहा है और क्षेत्र के कई स्थानों के “मानकीकृत” चीनी नाम भी जारी करता रहा है।
इंटरव्यू में गाओ ने दोहराया कि चीन ने “कभी मैकमोहन लाइन को स्वीकार नहीं किया” और दावा किया कि यह इलाका ऐतिहासिक रूप से तिब्बत और चीन का हिस्सा था।
उन्होंने अरुणाचल प्रदेश को “कब्जा किया गया चीनी क्षेत्र” बताते हुए कहा कि भारत को अंततः सीमा विवाद पर “आपसी सहमति वाला समाधान” निकालना चाहिए।
हालांकि भारत लगातार चीन के इन दावों को खारिज करता आया है। नई दिल्ली का स्पष्ट रुख है कि अरुणाचल प्रदेश “भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।” भारत ने चीन द्वारा स्थानों के नाम बदलने की कवायद को भी “काल्पनिक प्रयास” करार दिया है, जिनसे जमीनी सच्चाई नहीं बदलती।
भारत-चीन की तुलना पर भी टिप्पणी
इंटरव्यू के एक अन्य हिस्से में गाओ ने भारत और चीन की आर्थिक तथा तकनीकी प्रगति की तुलना करते हुए कहा कि 1978 के बाद दोनों देशों के बीच अंतर काफी बढ़ गया है।
उन्होंने दावा किया कि औद्योगिक क्षमता, वैज्ञानिक नवाचार और सैन्य उत्पादन के मामले में चीन भारत से “कम से कम 20 से 30 साल आगे” है।
गाओ ने कहा, “चीन अपने सभी सैन्य हथियार खुद बनाता है। भारत कभी भी सभी सैन्य हथियार पूरी तरह खुद नहीं बना सकता।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत चीन के साथ आर्थिक जुड़ाव नहीं बढ़ाता, तो उसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
संवेदनशील समय में आया बयान
गाओ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत और चीन 2020 की Galwan Valley clash के बाद बिगड़े संबंधों को धीरे-धीरे सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।
पूर्वी लद्दाख में लंबे सैन्य गतिरोध के बाद 2024 के अंत से दोनों देशों ने तनाव कम करने के कदम उठाए हैं। उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ताएं फिर से शुरू हुई हैं और दोनों पक्ष सीमा पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
राजनीतिक तनाव के बावजूद व्यापारिक संबंध भी मजबूत बने हुए हैं और चीन अब भी भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है।
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