सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों का मामला अब 3 जजों की पीठ सुनेगी
मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण आर. गवई ने बुधवार को आवारा कुत्तों पर लिए गए स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) मामले को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ से हटाकर नई तीन जजों की पीठ को सौंप दिया। यह कदम उस समय उठाया गया जब दो दिन पहले..
नयी दिल्ली। मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण आर. गवई ने बुधवार को आवारा कुत्तों पर लिए गए स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) मामले को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ से हटाकर नई तीन जजों की पीठ को सौंप दिया। यह कदम उस समय उठाया गया जब दो दिन पहले पारदीवाला पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखने का निर्देश दिया था।
नई पीठ, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति विक्रम नाथ करेंगे, इस मामले की सुनवाई गुरुवार को करेगी। इसमें न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजनिया भी शामिल रहेंगे।
यह बदलाव तब हुआ जब एनजीओ कॉन्फ्रेंस फॉर ह्यूमन राइट्स (इंडिया) की वकील ननीता शर्मा ने सीजेआई से कहा कि पारदीवाला पीठ के आदेश 2024 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से टकराते हैं, जिसमें समुदायिक कुत्तों की अंधाधुंध हत्या पर रोक लगाई गई थी और प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट, 1960 तथा एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स का पालन अनिवार्य किया गया था।
9 मई 2024 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि "कुत्तों की अंधाधुंध हत्या नहीं हो सकती" और सभी कदम कानून के तहत ही उठाए जाने चाहिए।
11 अगस्त को पारदीवाला- महादेवन पीठ ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में आठ हफ्ते के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखने और उन्हें वापस सड़क पर न छोड़ने का निर्देश दिया था। यह आदेश एक छह साल की बच्ची की रैबीज़ से मौत के बाद आया था।
हालांकि, इस आदेश का पशु अधिकार समूहों ने विरोध किया और कहा कि इससे जानवरों को अनावश्यक पीड़ा होगी। उनका कहना था कि वैक्सीनेशन, नसबंदी और सामुदायिक भोजन जैसे मानवीय तरीके ज्यादा प्रभावी हैं।
बुधवार को जारी लिखित आदेश में यह भी कहा गया कि..
- कुत्तों के साथ किसी भी तरह की क्रूरता या खराब देखभाल नहीं होनी चाहिए।
- शेल्टर में भीड़भाड़ न हो, जानवरों को भूखा न रखा जाए।
- कमजोर कुत्तों को अलग रखा जाए और समय पर चिकित्सा दी जाए।
- गोद लेने की प्रक्रिया सख्त शर्तों और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के प्रोटोकॉल के तहत ही हो।
- गोद लिए गए कुत्तों को फिर से सड़कों पर छोड़ना प्रतिबंधित रहेगा।
नई तीन जजों की पीठ अब पिछले आदेश की समीक्षा कर सकती है, उसे रोक सकती है या मामले को और बड़ी पीठ के पास भेज सकती है।
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