भारत-नेपाल सीमा के पास 429 अवैध ढांचे ढहाए गए
गुरुवार को चार और अवैध ढांचों को ध्वस्त करने के साथ, उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा अब तक कुल 429 अवैध निर्माणों को गिराया जा चुका है..
लखनऊ। गुरुवार को चार और अवैध ढांचों को ध्वस्त करने के साथ, उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा अब तक कुल 429 अवैध निर्माणों को गिराया जा चुका है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने भारत-नेपाल सीमा से लगे 10 किमी के दायरे में 236 और अवैध धार्मिक संरचनाओं की पहचान की है जो सरकारी ज़मीन पर बनी थीं।
यह कार्रवाई राज्य सरकार के निर्देश पर स्थानीय प्रशासन द्वारा चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य है सरकारी भूमि पर बिना अनुमति बने अवैध ढांचों को हटाना। इनमें मुख्य रूप से मदरसे, मस्जिदें, ईदगाहें और मज़ारें शामिल हैं, जिन्हें संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा माना जा रहा है।
जिलावार आंकड़े
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जिला |
मदरसे |
मस्जिद/ईदगाह |
मज़ारें |
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श्रावस्ती |
95 |
2 |
3 |
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महराजगंज |
21 |
10 |
7 |
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बलरामपुर |
31 |
0 |
9 |
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सिद्धार्थनगर |
19 |
1 |
0 |
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बहराइच |
13 |
9 |
3 |
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लखीमपुर खीरी |
3 |
3 |
0 |
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पीलीभीत |
1 |
2 |
1 |
प्रशासन की चिंता
अधिकारियों ने बताया कि इन ढांचों में से अधिकांश राजस्व या वन विभाग की भूमि पर बिना किसी वैध अनुमति के बनाए गए थे। कुछ मामलों में इन संरचनाओं को गैर-नियंत्रित वित्तीय स्रोतों से जुड़े होने का भी संदेह है। प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि इस तरह के अतिक्रमण न सिर्फ भूमि कानूनों का उल्लंघन करते हैं, बल्कि सीमा पार से घुसपैठ और धार्मिक उग्रवाद जैसे सुरक्षा जोखिमों को भी बढ़ावा देते हैं।
गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सैटेलाइट इमेजिंग और ड्रोन मैपिंग के ज़रिए इन क्षेत्रों पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां इन ढांचों का संचालन करने वाले संगठनों के पृष्ठभूमि की जांच कर रही हैं।
सरकार का स्पष्टीकरण
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, "यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य सरकारी भूमि को मुक्त कराना और कानून का शासन स्थापित करना है।"
"सीमा क्षेत्र जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी अवैध निर्माण — चाहे वह धार्मिक हो या अन्य — को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
यह अभियान भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में राष्ट्र सुरक्षा को सुनिश्चित करने, अवैध निर्माणों पर रोक लगाने और कानूनी व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में राज्य सरकार की बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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