भारत और तालिबान के बीच पहली राजनीतिक बातचीत
भारत और तालिबान के बीच पहली बार राजनीतिक स्तर पर संपर्क स्थापित हुआ है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी से बातचीत की और 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की मुत्ताकी द्वारा की गई कड़ी निंदा की सराहना की..
नयी दिल्ली। भारत और तालिबान के बीच पहली बार राजनीतिक स्तर पर संपर्क स्थापित हुआ है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी से बातचीत की और 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की मुत्ताकी द्वारा की गई कड़ी निंदा की सराहना की।
पिछले कुछ वर्षों में भारत और तालिबान के बीच संबंधों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है, जिसकी झलक इस आतंकी हमले के बाद हुई घटनाओं में साफ दिखी। भारत द्वारा पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अफगानिस्तान ने न केवल पाकिस्तान के इस दावे को खारिज कर दिया कि भारत ने अफगान क्षेत्र में मिसाइल दागे हैं, बल्कि 28 अप्रैल को भारतीय अधिकारियों के साथ बैठक में हमले के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने की मांग भी की।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने मुत्ताकी द्वारा भारत और अफगानिस्तान के बीच अविश्वास पैदा करने के प्रयासों व झूठी रिपोर्टों को सिरे से खारिज करने का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “अफगान जनता के साथ हमारी पारंपरिक मित्रता और उनके विकास की जरूरतों के लिए भारत के निरंतर समर्थन को रेखांकित किया। सहयोग को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई।”
भारत और तालिबान के बीच दूरी पैदा करने के एक और प्रयास के तहत तालिबान को पहलगाम हमले से जोड़ने की भी कोशिश की गई थी। भारत के लिए अफगानिस्तान के साथ घनिष्ठ संबंध इस कारण भी महत्वपूर्ण हैं ताकि पाकिस्तान को वह तथाकथित "रणनीतिक गहराई" न मिल सके, जिसकी उसे भारत के साथ सैन्य संघर्ष की स्थिति में जरूरत पड़ती है।
हालांकि भारत ने अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, फिर भी भारत के वरिष्ठ विदेश मंत्रालय अधिकारी अफगानिस्तान का नियमित दौरा कर रहे हैं। भारत ने वहां अपनी बंद पड़ी दूतावास को पुनः खोला है और सहायता वितरण कार्य की निगरानी के लिए तकनीकी टीम तैनात की है। यह दूतावास अगस्त 2021 में तालिबान के काबुल वापसी के बाद बंद कर दिया गया था।
इस साल जनवरी में, बिना औपचारिक मान्यता के भी भारत और तालिबान के संबंधों में एक बड़ा कदम देखने को मिला जब भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दोहा में मुत्ताकी से मुलाकात की।
मुत्ताकी लगातार भारत से अफगान व्यापारियों और मरीजों के लिए अधिक वीजा जारी करने की मांग कर रहे हैं। जयशंकर के साथ बातचीत में भी उन्होंने यह मांग दोहराई, साथ ही भारत में बंद अफगान कैदियों की रिहाई और स्वदेश वापसी की बात भी की। बताया गया है कि जयशंकर ने अफगान कैदियों के मुद्दे पर शीघ्र ध्यान देने और वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने का आश्वासन दिया।
हाल ही में भारत ने संकेत दिए हैं कि वह अफगानिस्तान में भारतीय परियोजनाओं पर फिर से काम शुरू करने पर विचार कर रहा है और कुछ नई अवसंरचना परियोजनाओं की शुरुआत की भी योजना बना रहा है। अफगान पक्ष द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, मुत्ताकी ने भारत के साथ व्यापार और राजनयिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया और ईरान में रणनीतिक चाबहार बंदरगाह के विकास को प्राथमिकता देने की बात कही।
What's Your Reaction?