'गाली-गलौज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं': शार्मिष्ठा पनौली की गिरफ्तारी पर कोलकाता पुलिस का पक्ष
22 वर्षीय सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और लॉ स्टूडेंट शार्मिष्ठा पनौली की गिरफ्तारी को लेकर मचे बवाल के बीच कोलकाता पुलिस ने रविवार को एक विस्तृत बयान जारी कर अपनी कार्रवाई का बचाव किया..
कोलकाता। 22 वर्षीय सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और लॉ स्टूडेंट शार्मिष्ठा पनौली की गिरफ्तारी को लेकर मचे बवाल के बीच कोलकाता पुलिस ने रविवार को एक विस्तृत बयान जारी कर अपनी कार्रवाई का बचाव किया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि "हेट स्पीच और अपमानजनक भाषा" को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं कहा जा सकता।
पुलिस की सफाई
पुलिस ने उन दावों को "भ्रामक और शरारतपूर्ण" बताया जिनमें कहा गया था कि पनौली को पाकिस्तान विरोधी या देशभक्ति वाले विचार रखने पर गिरफ़्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि मामला धार्मिक विद्वेष फैलाने और समुदायों में नफरत भड़काने जैसे गंभीर आरोपों पर आधारित है।
"राष्ट्रीय गौरव का सम्मान किया जाता है, लेकिन किसी भी वर्ग का अपमान या अपदर्शन कानूनन दंडनीय है, खासकर तब जब पूरा देश एकजुट हो।" — कोलकाता पुलिस
वीडियो को लेकर विवाद
पनौली ने अपने अब डिलीट किए गए वीडियो में बॉलीवुड के मुस्लिम अभिनेताओं की आलोचना की थी कि वे "ऑपरेशन सिंदूर" (पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी शिविरों पर भारतीय सैन्य कार्रवाई) पर चुप क्यों हैं। इस वीडियो में कथित तौर पर गाली-गलौज और सांप्रदायिक टिप्पणियां की गई थीं। बाद में उन्होंने वीडियो हटा लिया और माफी भी मांगी।
गिरफ्तारी की प्रक्रिया
- 15 मई को कोलकाता के गार्डन रीच पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई।
- पनौली गुड़गांव में रह रही थीं और नोटिस देने के कई प्रयास विफल रहे।
- कोर्ट से वारंट जारी होने के बाद 30 मई की रात उन्हें गुड़गांव से गिरफ़्तार किया गया।
- उन्हें कोलकाता लाकर पेश किया गया और 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
मामला किन धाराओं में दर्ज हुआ?
पनौली पर नव लागू भारतीय न्याय संहिता (BNSS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें सांप्रदायिक नफरत भड़काने और सार्वजनिक शांति भंग करने के आरोप शामिल हैं।
पुलिस का तर्क
- "शार्मिष्ठा की गिरफ्तारी पाकिस्तान विरोधी होने या देशभक्त होने के कारण नहीं हुई है।"
- "उन्होंने जिस तरह की भाषा और विचार साझा किए, वह विभिन्न समुदायों में नफरत फैलाने वाला था।"
- "ऐसे कार्य हमारे दुश्मनों को ही फायदा पहुंचाते हैं।"
बीजेपी का पलटवार
- बीजेपी नेता अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि पनौली को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया।
- उन्होंने कहा, "उन्होंने 15 मई को ही माफ़ी मांग ली थी और वीडियो हटा दिया था, फिर 30 मई को गिरफ़्तारी क्यों?"
- उन्होंने ममता बनर्जी पर भी सवाल उठाए: "क्या यही कानून मुख्यमंत्री के लिए भी लागू होगा जिन्होंने खुद भड़काऊ बयान दिए हैं?"
राजनीतिक पृष्ठभूमि
बीजेपी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने एक "हिंदू युवती को वोट बैंक appeasement" के तहत गिरफ़्तार किया है।
वहीं पुलिस का कहना है कि यह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई कार्रवाई है और सोशल मीडिया पर ज़िम्मेदारी से व्यवहार करने की अपील भी की है।
"अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन धार्मिक या सामाजिक नफरत फैलाने वाली बातों पर कानून सख्त होगा।"
यह मामला अभिव्यक्ति की आज़ादी और सांप्रदायिकता की सीमा को लेकर राष्ट्रीय बहस छेड़ सकता है — और आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक असर और भी बढ़ सकता है।
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