शपथपत्र दो या माफी मांगो, तीसरा विकल्प नहीं: 'वोट चोरी' आरोपों पर राहुल गांधी को सीईसी का 7 दिन का अल्टीमेटम
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर 2024 लोकसभा चुनावों में “वोट चोरी” के आरोपों को लेकर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि गांधी या तो सात दिन के भीतर शपथपत्र (Affidavit) दाखिल करें या फिर अपने आरोप वापस लेकर देश से माफी..
नयी दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर 2024 लोकसभा चुनावों में “वोट चोरी” के आरोपों को लेकर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि गांधी या तो सात दिन के भीतर शपथपत्र (Affidavit) दाखिल करें या फिर अपने आरोप वापस लेकर देश से माफी माँगें।
पदभार संभालने के छह महीने बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुमार ने कहा, “या तो शपथपत्र दीजिए या फिर देश से माफी मांगिए। तीसरा कोई विकल्प नहीं है। यदि सात दिन में शपथपत्र नहीं दिया गया, तो सभी आरोप निराधार माने जाएंगे।” इस दौरान उनके साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद थे।
ज्ञानेश कुमार ने कुछ राजनीतिक नेताओं पर चुनाव आयोग के कंधों पर रखकर बंदूक चलाने और भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आयोग केवल पावरपॉइंट प्रेज़ेंटेशन या दावों पर कार्रवाई नहीं कर सकता, उसके लिए कानूनी आधार होना ज़रूरी है।
विपक्ष का ‘वोट चोरी’ अभियान
ये बयान उस दिन आए जब राहुल गांधी ने बिहार में “वोटर अधिकार यात्रा” की शुरुआत की। विपक्षी दलों ने यहाँ मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) प्रक्रिया को चुनौती दी है।
गांधी पहले भी दावा कर चुके हैं कि 2024 में कर्नाटक की महादेवपुरा सीट पर डुप्लीकेट एंट्री और फर्जी पते के जरिए 1 लाख से अधिक वोट “चुराए गए।”
कुमार ने कहा, “अगर कोई गलत तथ्यों के साथ पीपीटी प्रेज़ेंटेशन बनाकर सोचता है कि ईसीआई कार्रवाई करेगा, तो ऐसा नहीं होगा। ऐसे गंभीर मामले में बिना शपथपत्र कार्रवाई करना क़ानून और संविधान के खिलाफ होगा।”
उन्होंने माना कि मतदाता सूची में विसंगतियाँ (discrepancies) पाई गई हैं, लेकिन डुप्लीकेशन का मतलब यह नहीं कि एक व्यक्ति ने कई बार मतदान किया। उन्होंने बताया कि SIR प्रक्रिया के तहत अब तक तीन लाख से अधिक त्रुटियों को ठीक किया जा चुका है।
आयोग का मतदाता सूची संशोधन पर बचाव
सीईसी ने इस आरोप को खारिज किया कि मतदाता सूची संशोधन जल्दबाज़ी में किया गया। उन्होंने कहा, “हर चुनाव से पहले मतदाता सूची सुधारना हमारी कानूनी ज़िम्मेदारी है।”
कुमार ने सभी दलों से आग्रह किया कि बिहार की प्रारंभिक मतदाता सूची में त्रुटियों की ओर 1 सितंबर से पहले ध्यान दिलाएँ। उन्होंने बताया कि SIR के तहत हटाए गए नाम पहले से ही ज़िला वेबसाइटों पर प्रकाशित हैं, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है।
कुमार ने कहा, “चुनाव आयोग सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों में कोई भेदभाव नहीं करता। दोनों हमारे लिए समान हैं।” और विपक्ष के आरोपों को “झूठ को बार-बार दोहराने” जैसा बताया।
उन्होंने मशीन-रीडेबल डिजिटल रोल की मांग पर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया, जिसमें मतदाता की गोपनीयता की रक्षा के लिए ऐसी सुविधा पर रोक लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध सर्चेबल सूची पर्याप्त है।
ज्ञानेश कुमार ने कहा, “चुनाव आयोग राजनीति की परवाह किए बिना सभी वर्गों के मतदाताओं के साथ चट्टान की तरह खड़ा रहेगा,” और “वोट चोरी” आरोपों को सबूत के बिना आधारहीन बताया।
कांग्रेस व विपक्ष का पलटवार
मुख्य चुनाव आयुक्त की 85 मिनट लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कांग्रेस ने कहा कि सीईसी ने राहुल गांधी द्वारा उठाए गए किसी भी सवाल का सार्थक जवाब नहीं दिया। उन्होंने आयोग के “विपक्ष और सत्ता में फर्क नहीं करने” के दावे को “हास्यास्पद” बताया। कई विपक्षी नेताओं ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को सीईसी का “एकालाप” करार दिया।
इससे पहले रविवार को ही सीईसी ने बताया कि बिहार की प्रारंभिक मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख नामों का विवरण और उनके कारण ज़िलाधिकारी की वेबसाइट पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप अपलोड कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते बिहार में चुनाव से पहले हो रही SIR प्रक्रिया पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि हटाए गए नाम और उनके कारण सार्वजनिक किए जाएँ ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
कुमार ने बताया कि आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (EROs), जो उपमंडल मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी होते हैं, बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) की मदद से मतदाता सूची तैयार और अंतिम रूप देते हैं।
प्रारंभिक मतदाता सूची राजनीतिक दलों को डिजिटल व फिजिकल दोनों स्वरूपों में साझा की जाती है और आयोग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध होती है। इसके बाद एक महीने तक दावे और आपत्तियाँ दाखिल करने का समय रहता है।
बिहार में यह प्रारंभिक सूची 1 अगस्त को प्रकाशित हुई है और 1 सितंबर तक खुली रहेगी। इस दौरान पात्र मतदाताओं के नाम जुड़वाने और अपात्र नाम हटवाने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
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