पाकिस्तान और चीन के लिए बुरी खबर: डीआरडीओ ने एक ही लॉन्चर से ‘प्रलय’ मिसाइलों का सफल लॉन्च किया, इसलिए हैं ये बेहद घातक..

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बुधवार सुबह ओडिशा तट के पास एक ही लॉन्चर से बेहद कम समय के अंतराल में दो ‘प्रलय’ मिसाइलों का सफल लॉन्च किया। इस परीक्षण को भारत की सामरिक क्षमताओं के लिहाज से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा..

पाकिस्तान और चीन के लिए बुरी खबर: डीआरडीओ ने एक ही लॉन्चर से ‘प्रलय’ मिसाइलों का सफल लॉन्च किया, इसलिए हैं ये बेहद घातक..
01-01-2026 - 10:13 AM

नयी दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बुधवार सुबह ओडिशा तट के पास एक ही लॉन्चर से बेहद कम समय के अंतराल में दो ‘प्रलय’ मिसाइलों का सफल लॉन्च किया। इस परीक्षण को भारत की सामरिक क्षमताओं के लिहाज से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना, भारतीय सेना, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) और उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कम समय में लगातार मिसाइलों के सफल प्रक्षेपण से ‘प्रलय’ मिसाइल की विश्वसनीयता पूरी तरह स्थापित हुई है।

रक्षा मंत्रालय (MoD) के बयान के अनुसार, यह उड़ान परीक्षण सुबह करीब 10:30 बजे उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण (यूज़र इवैल्युएशन ट्रायल) के तहत किया गया। दोनों मिसाइलों ने निर्धारित मार्ग का सटीक रूप से पालन किया और सभी उड़ान उद्देश्यों को पूरा किया। चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज द्वारा तैनात ट्रैकिंग सेंसरों से इसकी पुष्टि हुई। वहीं, टर्मिनल चरण की घटनाओं की पुष्टि प्रभाव बिंदुओं के पास तैनात जहाज पर लगे टेलीमेट्री सिस्टम से की गई।

प्रलय’ एक स्वदेशी रूप से विकसित ठोस ईंधन (सॉलिड प्रोपेलेंट) आधारित क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसमें अत्याधुनिक मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे यह बेहद उच्च सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। यह मिसाइल विभिन्न प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है और अलग-अलग तरह के लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।

इस मिसाइल का विकास हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं के सहयोग से किया है। इनमें डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी, एडवांस्ड सिस्टम्स लैबोरेटरी, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, हाई एनर्जी मटेरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी, डिफेंस मेटलर्जिकल रिसर्च लैबोरेटरी, टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (इंजीनियर्स) और इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज शामिल हैं। इसके अलावा, विकास-सह-उत्पादन साझेदार के रूप में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) तथा अन्य भारतीय उद्योगों ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन परीक्षणों के दौरान सभी प्रणालियों का एकीकरण विकास-सह-उत्पादन साझेदारों द्वारा किया गया था। इन परीक्षणों को डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, भारतीय वायुसेना और भारतीय सेना के उपयोगकर्ता प्रतिनिधियों तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा।

डीआरडीओ के सचिव और संगठन के अध्यक्ष समीर वी. कामत ने भी सफल उड़ान परीक्षणों के लिए डीआरडीओ की टीमों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इस प्रणाली को जल्द ही सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।