डोनाल्ड ट्रंप ईरान के नए प्रस्ताव की समीक्षा में, युद्ध खत्म होने पर संशय बरकरार
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान द्वारा दिए गए नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य चल रहे संघर्ष को समाप्त करना है। हालांकि, उन्होंने इस पर संदेह जताया कि इससे कोई ठोस समझौता हो पाएगा, यह कहते हुए कि ईरान ने ..
नयी दिल्ली। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान द्वारा दिए गए नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य चल रहे संघर्ष को समाप्त करना है। हालांकि, उन्होंने इस पर संदेह जताया कि इससे कोई ठोस समझौता हो पाएगा, यह कहते हुए कि ईरान ने “अब तक पर्याप्त बड़ी कीमत नहीं चुकाई है।”
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े सूत्रों का दावा है कि तेहरान ने पाकिस्तान के माध्यम से 14 बिंदुओं का एक प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, इस पर ईरानी मीडिया की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच, तीन सप्ताह से जारी एक नाजुक युद्धविराम फिलहाल कायम है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य में तनाव
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बना हुआ है। अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि यदि वे सुरक्षित मार्ग के लिए ईरान को भुगतान करती हैं तो उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। साथ ही, अमेरिकी नौसेना ने नाकेबंदी लागू की है, जिसके चलते कई जहाजों को वापस लौटना पड़ा है।
ईरानी टैंकर ने तोड़ी नाकेबंदी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी का एक बहुत बड़ा क्रूड कैरियर (VLCC) अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को पार कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहुंच गया है। इस जहाज में करीब 19 लाख बैरल कच्चा तेल है, जिसकी कीमत लगभग 220 मिलियन डॉलर बताई जा रही है।
मॉनिटरिंग फर्म TankerTrackers.com ने इस जहाज का नाम “HUGE” बताया है। इसे आखिरी बार एक हफ्ते पहले श्रीलंका के पास देखा गया था और अब यह लोम्बोक जलडमरूमध्य के रास्ते रियाउ द्वीपसमूह की ओर बढ़ रहा है।
यह जहाज 13 अप्रैल को ईरानी जलक्षेत्र में था, उसी समय अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की घोषणा की थी।
नाकेबंदी पर दावे-प्रतिदावे
ईरान के सरकारी मीडिया ने 29 अप्रैल को दावा किया कि कम से कम 52 ईरानी जहाज अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने में सफल रहे हैं। वहीं, अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने नाकेबंदी शुरू होने के बाद से लगभग 41 ईरान-समर्थित जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर किया है।
“न युद्ध, न शांति” की स्थिति
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने मौजूदा हालात को “न युद्ध, न शांति” की स्थिति बताया। उन्होंने तत्काल संघर्ष विराम की मांग करते हुए कहा कि वैश्विक स्थिरता उन देशों पर निर्भर करती है जिन्होंने युद्ध की शुरुआत की।
उन्होंने सवाल उठाया कि ऊर्जा संकट से जूझ रहे देश अमेरिका और इजराइल पर दबाव क्यों नहीं बना रहे हैं।
इटली की चिंता
इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के साथ फोन पर बातचीत में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई।
तजानी ने कहा कि ईरान का सैन्य उद्देश्य से परमाणु कार्यक्रम विकसित करना “रेड लाइन” है और इससे क्षेत्र में खतरनाक परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है।
चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों को ठुकराया
चीन ने स्पष्ट किया है कि वह ईरानी तेल खरीदने वाली पांच कंपनियों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन नहीं करेगा। चीन का वाणिज्य मंत्रालय पहले ही कह चुका है कि अमेरिकी प्रतिबंधों को “न तो मान्यता दी जाएगी, न लागू किया जाएगा और न ही उनका पालन किया जाएगा।”
चीन, ईरानी तेल का एक बड़ा खरीदार है, खासकर छोटे “टीपॉट” रिफाइनरियों के जरिए, जो रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदती हैं।
निष्कर्ष:
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं लेकिन हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। युद्धविराम कायम है, पर स्थायी समाधान को लेकर अनिश्चितता बरकरार है।
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