कैश एट होम विवाद: जस्टिस यशवंत वर्मा ने संभावित महाभियोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, कहा - मुझे नहीं सुना गया
महाभियोग से खुद को बचाने की आखिरी कोशिश में जस्टिस यशवंत वर्मा ने देर रात सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और कैश एट होम विवाद में उनके खिलाफ आए इन-हाउस जांच पैनल की रिपोर्ट को चुनौती दी। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने 8 मई को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजी गई सिफारिश को रद्द करने..
नयी दिल्ली। महाभियोग से खुद को बचाने की आखिरी कोशिश में जस्टिस यशवंत वर्मा ने देर रात सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और कैश एट होम विवाद में उनके खिलाफ आए इन-हाउस जांच पैनल की रिपोर्ट को चुनौती दी। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने 8 मई को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजी गई सिफारिश को रद्द करने की मांग की है, जिसमें उन्हें हटाने की बात कही गई थी।
यह याचिका संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले दाखिल की गई है, जिसमें सरकार उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। यह सत्र 21 जुलाई से 12 अगस्त तक चलेगा। वर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया और बिना सुनवाई के दोषी ठहरा दिया गया।
यह मामला तब सामने आया जब उनके घर में आग लगने की घटना के बाद अग्निशमन दल पहुंचा और वहां से जले हुए नोटों से भरे बोरे बरामद हुए। इसके बाद उनके खिलाफ उच्चस्तरीय जांच शुरू हुई।
अब अपनी याचिका में जस्टिस वर्मा ने तीन सदस्यीय जांच पैनल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उन्हें पूरा और निष्पक्ष अवसर दिए बिना प्रतिकूल निष्कर्ष निकाले। उन्होंने कहा कि समिति ने उस आधारभूत तथ्य की ठीक से जांच नहीं की, जिसमें कहा गया था कि 14 मार्च को मौके पर पहुंची पहली टीम को कथित नकदी मिली थी — यह तथ्य उनकी संलिप्तता तय करने के लिए जरूरी था।
जस्टिस वर्मा ने यह भी कहा कि नकदी उनके आवास के आउटहाउस में मिली थी, और यह साबित करने के लिए कि नकदी उनकी थी या नहीं, उसकी प्रामाणिकता और अन्य जरूरी पहलुओं की जांच जरूरी थी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय जांच समिति, जिसे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए गठित किया गया था, ने अपनी रिपोर्ट तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना को 3 मई को सौंप दी थी। यह समिति विशेष रूप से उनके आवास से नकदी बरामदगी के मामले की जांच के लिए बनाई गई थी। वर्मा इस समय इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं।
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस तीन सदस्यीय समिति में शामिल थे — पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जी.एस. संधावालिया, और कर्नाटक हाईकोर्ट की जज जस्टिस अनु शिवरामन।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जांच पूरी होने तक जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा जाएगा। जस्टिस वर्मा ने पहले ही यह स्पष्ट किया था कि उन्हें अपने आवास के स्टोररूम या आउटहाउस में पड़ी किसी भी नकदी की जानकारी नहीं थी।
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