हॉर्मुज़ में संकट: 19 जहाज फंसे, भारत ने बनाई बचाव योजना
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच, भारत के लिए तेल, एलपीजी और एलएनजी लेकर जा रहे कुल 19 जहाज इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) में फंसे हुए हैं। ऐसे में नई दिल्ली ने सबसे पहले भारतीय ध्वज (Indian-flagged) वाले जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना..
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच, भारत के लिए तेल, एलपीजी और एलएनजी लेकर जा रहे कुल 19 जहाज इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) में फंसे हुए हैं। ऐसे में नई दिल्ली ने सबसे पहले भारतीय ध्वज (Indian-flagged) वाले जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना बनाई है। यह जानकारी पोत, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने दी।
अब तक आठ भारतीय ध्वज वाले जहाज सुरक्षित रूप से इस क्षेत्र से निकल चुके हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ केवल अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बंद है, जबकि “मित्र देशों” के जहाजों को इस संकरे जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
फंसे हुए जहाजों का विवरण
राजेश कुमार सिन्हा ने एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में बताया कि..
- कुल 10 विदेशी ध्वज वाले जहाज भारत के लिए ऊर्जा सामग्री लेकर जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
- 3 एलपीजी जहाज
- 4 कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के टैंकर
- 3 एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) कैरियर
इसके अलावा भारतीय ध्वज वाले जहाज भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं, जिनमें:
- 3 एलपीजी टैंकर
- 1 एलएनजी कैरियर
- 4 कच्चे तेल के टैंकर
- एक खाली टैंकर, जिसमें एलपीजी भरी जा रही है
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए खाड़ी देशों से पूरी दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति होती है।
भारत की रणनीति
सिन्हा ने कहा, “हमारी पहली प्राथमिकता भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना है। अभी हम उस स्थिति में नहीं पहुंचे हैं कि जहाजों को वापस भेजकर दोबारा लोड कराया जाए।”
उन्होंने बताया कि मंत्रालय पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, खासकर..
- भारतीय नाविकों की सुरक्षा
- जहाजों की आवाजाही
- बंदरगाह संचालन
उन्होंने यह भी कहा कि..
- क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं
- पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई
- पिछले 72 घंटों से स्थिति स्थिर बनी हुई है
पहले कितने जहाज थे
जब पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हुआ था, उस समय कुल 28 भारतीय जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में थे। पश्चिमी हिस्से में 24 जहाज और 4 जहाज थे। पिछले कुछ दिनों में पश्चिमी हिस्से से 6 जहाज तथा पूर्वी हिस्से से 2 जहाज सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं
युद्ध की पृष्ठभूमि
यह तनाव 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर हमले किए। इसके जवाब में तेहरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी और अन्य ठिकानों पर हमला किया।
सुरक्षित पहुंचे भारतीय जहाज
कई भारतीय जहाज इस संकट के बीच सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं..
- पाइन गैस और जग वसंत (कुल 92,612 टन एलपीजी)
- 26 से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे
- इससे पहले एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी (92,712 टन एलपीजी) और फिर 16 मार्च को मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) और 17 मार्च को कांडला पोर्ट पहुंचे।
- जग लाड़की (80,886 टन कच्चा तेल, यूएई से)
- 18 मार्च को मुंद्रा पहुंचा
- जग प्रकाश (ओमान से गैसोलीन लेकर अफ्रीका जा रहा जहाज)
- सुरक्षित रूप से स्ट्रेट पार कर तंजानिया की ओर बढ़ रहा है
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