डिजिटल अरेस्ट: साइबर ठगों से बढ़ता खतरा, कैसे बचें लाखों की ठगी से?

डिजिटल युग ने हमारी जिंदगी को जितना आसान बनाया है, उतना ही खतरनाक भी बना दिया है। अब साइबर अपराधी हर रोज़ नए तरीकों से लोगों को फंसाकर लाखों रुपए की ठगी कर रहे हैं। हाल के महीनों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नामक धोखाधड़ी तेजी से बढ़ी है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी या सरकारी एजेंट दिखाकर पीड़ितों को डराते हैं और पैसे ऐंठते..

डिजिटल अरेस्ट: साइबर ठगों से बढ़ता खतरा, कैसे बचें लाखों की ठगी से?
22-09-2025 - 12:06 PM

डिजिटल युग ने हमारी जिंदगी को जितना आसान बनाया है, उतना ही खतरनाक भी बना दिया है। अब साइबर अपराधी हर रोज़ नए तरीकों से लोगों को फंसाकर लाखों रुपए की ठगी कर रहे हैं। हाल के महीनों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नामक धोखाधड़ी तेजी से बढ़ी है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी या सरकारी एजेंट दिखाकर पीड़ितों को डराते हैं और पैसे ऐंठते हैं। इस नए साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों ने लोगों में डर और सतर्कता की भावना को और मजबूत कर दिया है।

डिजिटल अरेस्ट क्या है?

डिजिटल अरेस्ट एक नया साइबर अपराध है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी के रूप में प्रस्तुत कर पीड़ितों को डराते हैं। वे कहते हैं कि पीड़ित किसी अपराध में शामिल हैं और तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डर के मारे, पीड़ित तुरंत पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।

हालिया मामले

उदुपी, कर्नाटक: 52 वर्षीय महिला को व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से ₹4.1 लाख की ठगी हुई।

मुंबई, महाराष्ट्र: एक कंपनी सचिव को 20 दिनों में ₹27 लाख की ठगी का सामना करना पड़ा।

पानीपत, हरियाणा: क्रेडिट कार्ड स्कैम में एक व्यक्ति ने ₹1 लाख की राशि ठग ली।

साइबर अपराधियों के नए तरीके

फर्जी वीडियो कॉल और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल।

आधिकारिक दस्तावेज़ों का दिखावा कर विश्वास जीतना।

बड़े पैमाने पर धन की हेराफेरी और डेटा चोरी।

बचाव के उपाय

अधिकारिक कॉल्स की पुष्टि करें: सरकारी या बैंक कॉल्स को आधिकारिक वेबसाइट/हेल्पलाइन से सत्यापित करें।

व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें: ओटीपी, बैंक विवरण, आधार या पैन नंबर किसी के साथ साझा न करें।

डिजिटल साक्षरता बढ़ाएं: साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें।

सुरक्षा सॉफ़्टवेयर का उपयोग करें: एंटीवायरस और सिक्योरिटी सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें।

कानूनी कार्रवाई

भारत में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में हाल के महीनों में वृद्धि हुई है। पुलिस और साइबर अपराध विभाग सक्रिय हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

अगर आप शिकार हो गए हैं तो क्या करें?

तत्काल रिपोर्ट करें: नज़दीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।

साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत करें।

बैंक को सूचित करें: खाते को अस्थायी रूप से ब्लॉक कराएं।

डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी से बचाव के लिए सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। साइबर अपराधियों के नए तरीकों से बचने के लिए हमेशा संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करना  भूलें।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।